नयी दिल्ली , अक्टूबर 24 -- वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने पंजाब के अमृतसर और तरनतारन जिलों में पराली जलाने की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए अधिकारियों को इन्हें रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने और किसानों को पराली प्रबंधन की मशीनें समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
सीएक्यूएम के अध्यक्ष राजेश वर्मा के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय दल ने शनिवार को अमृतसर और तरनतारन के उपायुक्तों तथा संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर पराली प्रबंधन के उपायों की समीक्षा की। बैठक में पराली को खेतों में ही प्रबंधित करने और खेतों से बाहर उसके उपयोग की व्यवस्था तथा दोनों जिलों में उपलब्ध सुविधाओं और बुनियादी ढांचे का जायजा लिया गया।
आयोग ने पराली का अधिकतम उपयोग ताप विद्युत संयंत्रों, ईंट भट्ठों और उन उद्योगों में ईंधन के रूप में करने पर जोर दिया और कहा कि इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों के नोडल अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपने और पराली के वास्तविक उपयोग की नियमित निगरानी तथा रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जानी चाहिए।
आयोग ने कहा कि तरनतारन में पराली जलाने की घटनाएं लगातार सर्वाधिक संख्या वाले जिलों में बनी हुई हैं। इसे देखते हुए वहां के उपायुक्त को इस मुद्दे को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और रोकथाम के प्रयास तेज करने को कहा गया। आयोग ने चेतावनी दी कि प्रभावी कदम उठाने में लापरवाही बरतने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित