जयपुर , अप्रैल 19 -- राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे ने कहा है कि भगवान परशुराम शस्त्र और शास्त्र के ही मर्मज्ञ नहीं थे, अन्याय और अनाचार का प्रतिरोध करते जीवन में आदर्श की स्थापना के प्रेरक हैं।
श्री बागड़े रविवार को बिड़ला सभागार में भगवान परशुराम जयंती समारोह में उनके जीवन प्रसंगों की चर्चा करते हुए यह बात कही। उन्होंने अक्षय तृतीया और भगवान परशुराम जयंती पर आयोजित प्रदेश स्तरीय पूजा आरती में भाग लिया। उन्होंने भगवान परशुराम की छवि पर पुष्प अर्पित कर उनकी विधिवत आरती उतारी और प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और संपन्नता की कामना की।
उन्हानें भगवान परशुरामजी के अवतरण दिवस की बधाई देते हुए कहा कि अक्षय तृतीया बौद्धिक क्षमताओं के विकास से जुड़ा पर्व है। वेद व्यासजी ने इसी दिन विघ्न विनाशक गणेश को महाभारत लिखने के लिए राजी किया था।
राज्यपाल ने कहा कि परशुरामजी बुद्धि और ज्ञान का समन्वय रखने वाले ऋषि थे। उनकी जयंती भगवान परशुराम को स्मरण करने का अवसर नहीं है, यह उनके आदर्शों त्याग, तप, शौर्य, और धर्म रक्षा की प्रतिज्ञा को अपने जीवन में उतारने तथा अन्याय के विरुद्ध निर्भीकता से खड़े होने का संकल्प लेने का पर्व है।
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