तिरुअनंतपुरम , अगस्त 11 -- प्रसिद्ध परमाणु वैज्ञानिक, केरल जन विज्ञान आंदोलन के सूत्रधार और शिक्षाविद डॉ. एमपी परमेश्वरन का मंगलवार को उम्र संबंधी अस्वस्थता के कारण केरल के त्रिशूर में निधन हो गया। वह 91 वर्ष के थे।

माकपा के राष्ट्रीय महासचिव एमए बेबी ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे जन आंदोलन और वैज्ञानिक चेतना के क्षेत्र में अपूरणीय क्षति बताया है।

'एक्स' पर अपनी संवेदनाएं साझा करते हुए एमए बेबी ने कहा, "डॉ. परमेश्वरन केरल के जन विज्ञान आंदोलन (केरल शास्त्र साहित्य परिषद) की सच्ची आत्मा थे। यह उनकी अमिट छाप ही थी कि शिक्षकों, विज्ञान प्रेमियों और बुद्धिजीवियों के एक छोटे से समूह तक सीमित संस्था को एक महान जन आंदोलन में बदल दिया गया। जिस प्रकार महात्मा गांधी ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को जन-आंदोलन में बदला, उसी तरह डॉ. परमेश्वरन ने जन विज्ञान आंदोलन का कायाकल्प किया।"उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण साक्षरता अभियान, जन योजना अभियान और स्कूली छात्रों के लिए विज्ञान शिक्षा जैसी अनगिनत दूरदर्शी पहलों पर उनकी सोच की स्पष्ट छाप दिखाई देती है। भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) में एक परमाणु वैज्ञानिक के रूप में उच्च विद्वता हासिल करने के बावजूद, उन्होंने पदों, उपाधियों और सम्मानों से दूर रहकर साधारण कार्यकर्ता की तरह काम करने का मार्ग चुना।

माकपा महासचिव ने कहा, "डॉ. परमेश्वरन की सादगी, आत्मीयता, वैचारिक स्पष्टता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता ने पीढ़ियों को प्रेरित किया है। ऐसे समय में जब अज्ञानता और रूढ़िवादिता के खिलाफ संघर्ष पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है, उनका जाना एक बड़ा नुकसान है।"उन्होंने डॉ. परमेश्वरन को श्रद्धांजलि देते हुए 'लाल सलाम' भी लिखा।

गौरतलब है कि डॉ. एमपी परमेश्वरन का योगदान केवल परमाणु विज्ञान और प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने भारत में विज्ञान को आम जनता की भाषा और सरोकारों से जोड़ने में एक युगान्तकारी भूमिका निभायी। भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) जैसी प्रतिष्ठित संस्था में वैज्ञानिक के पद से इस्तीफा देकर 'केरल शास्त्र साहित्य परिषद' (केएसएसपी) और साक्षरता अभियानों को जन-आंदोलन में बदलना उनकी दूरदर्शी सोच का प्रमाण था। एर्नाकुलम को देश का पहला पूर्ण साक्षर जिला बनाने से लेकर 'अखिल भारतीय जन विज्ञान नेटवर्क' की स्थापना तक, उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया।

लगभग तीन दशकों तक माकपा के सक्रिय सदस्य और विचारक रहने वाले डॉ. परमेश्वरन ने अपनी पुस्तक 'फोर्थ वर्ल्ड' के माध्यम से विकेंद्रीकृत लोकतंत्र और पर्यावरण-अनुकूल विकास का एक नया मॉडल पेश किया था। अपनी उच्च शैक्षणिक विद्वता और लंबे राजनीतिक सफर के बावजूद, वे पदों, उपाधियों और सम्मानों से दूर रहकर एक साधारण कार्यकर्ता की तरह सादगी से जीवन जीते रहे।

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