नयी दिल्ली , अप्रैल 16 -- केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने गुरूवार को कहा कि सरकार आयुष क्षेत्र में नीतिगत दिशा को मजबूत करने और प्रभावी कार्यान्वयन के प्रति संकल्पबद्ध है। उन्होंने कहा कि जीवन शैली से जुड़ी बीमारियों को दूर करने में आयुष की प्रासंगिकता बढ़ रही है।

वह राजधानी में आयुष चिंतन शिविर-2026 के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस शिविर का उद्देश्य प्रगति की समीक्षा करना, कमियों की पहचान करना और एक व्यावहारिक, भविष्य के लिए तैयार रोडमैप तैयार करना है। इस दिवसीय रणनीतिक विचार-मंथन कार्यक्रम आयुष में विभिन्न चुनिंदा विषयों पर विशेष परिचर्चा सत्र आयोजित किये गये हैं।

आयुष मंत्रालय के सचिव, वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि मंत्रालय चिकित्सा और स्वास्थ्य रक्षा के पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान के साथ एकीकृत करके आयुष को आगे बढ़ा रहा है, साथ ही अनुसंधान, वैश्विक सहयोग और जन-संपर्क को भी मजबूत कर रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये विचार-विमर्श ऐसे ठोस और समय-बद्ध परिणामों में परिणत होंगे जो "विकसित भारत 2047" की परिकल्पना में योगदान देंगे।

आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव अलारमेलमंगई डी. ने कहा कि आयुष, राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर बढ़ती पहचान के साथ, स्वास्थ्य सेवा का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरा है, और उन्होंने अनुसंधान, नवाचार तथा संस्थागत क्षमताओं को मजबूत करने के महत्व पर जोर दिया तथा इस काम में युवा पेशेवरों और शोधकर्ताओं की भूमिका को भी रेखांकित किया।

उद्घाटन सत्र में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए), नई दिल्ली और जनरल इंश्योरेंस काउंसिल के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) का आदान-प्रदान हुआजो आयुष उपचारों के लिए बीमा कवरेज का विस्तार करने और दावा निपटान तंत्र में सुधार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मंत्री की उपस्थिति में दस्तेवेजों का आदान-प्रदान एआईआईए के निदेशक प्रो. पी.के. प्रजापति और जनरल इंश्योरेंस काउंसिल की महासचिव कस्तूरी सेनगुप्ता ने किये।

साधारण बीमा परिषद की कार्यसमिति के सदस्य प्रो. बेजोन के. मिश्रा भी इस समारोह में शामिल थे।

आयुष मंत्री ने रीयल-टाइम संचार और नागरिक जुड़ाव को सुविधाजनक बनाने के लिए मंत्रालय का आधिकारिक व्हाट्ऐप चैनल का उद्घाटन किया। साथ ही, 'आयुष उपचारों के बीमा कवरेज और विभिन्न थेरेपी/हस्तक्षेपों के दावों के निपटान के लिए बेंचमार्क दरों का संशोधन' नामक दस्तावेज़ भी जारी किया गया, जिसका उद्देश्य आयुष स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता, सामर्थ्य और मानकीकरण को बढ़ाना है।

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