पन्ना , सितंबर 13 -- गणेश चतुर्थी पर्व की पूर्व संध्या पर मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व के अकोला गेट पर विश्व की सबसे उम्रदराज हथिनी मानी जाने वाली वत्सला की स्मृति में स्थापित प्रतिमा का अनावरण किया गया।

इस अवसर पर मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, पन्ना जिले के प्रभारी मंत्री इन्दर सिंह परमार, पन्ना विधायक बृजेन्द्र प्रताप सिंह सहित अन्य गणमान्य नागरिक एवं वरिष्ठजन उपस्थित रहे। वन विभाग की ओर से पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक, दक्षिण पन्ना के वन मंडलाधिकारी, उप संचालक, सहायक संचालक, परिक्षेत्र अधिकारी सहित वन अमला मौजूद रहा।

वत्सला की प्रतिमा की स्थापना और अनावरण में जे.के. सीमेंट अमानगंज की विशेष भूमिका रही। अनावरण के दौरान श्री तोमर ने विधि-विधान से वत्सला की पूजा-अर्चना कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनकी स्मृतियों को याद किया।

बताया गया कि वत्सला को विश्व की सबसे बुजुर्ग हथिनी माना जाता था। उनका जन्म लगभग वर्ष 1917 में केरल के नीलांबुर जंगलों में हुआ था। इसके बाद वह पन्ना आईं और यहां की भौगोलिक परिस्थितियों तथा उबड़-खाबड़ क्षेत्रों में लंबा जीवन व्यतीत किया। वत्सला ने अपने जीवन में किसी नर हाथी के साथ मेटिंग नहीं की और दूसरी हथिनियों के बच्चों का स्नेह एवं वात्सल्य के साथ लालन-पालन किया। उनके इसी स्वभाव के कारण वन्यजीव प्रेमी और स्थानीय लोग उन्हें आदरपूर्वक 'दादी मां' कहकर पुकारते थे।

वत्सला की एक विशेष पहचान उनकी लंबी सूंड भी थी। बताया गया कि वह इतनी लंबी थी कि वत्सला को खड़े होने पर दो से तीन फीट सूंड जमीन के ऊपर मोड़कर रखनी पड़ती थी। इस विशेषता के कारण वन्यजीव प्रेमी उन्हें 'पांच पैर वाली हथिनी' भी कहते थे।

वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार गुप्ता के अनुसार शुरुआती दिनों में वत्सला से लकड़ी की बोगियों को उठाने और रखने का कार्य कराया जाता था। उनके अनुसार उम्र बढ़ने के साथ वत्सला की सूंड भी लंबी होती गई।

वत्सला अब भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन वन्यजीव प्रेमियों के बीच उनकी स्मृतियां हमेशा जीवित रहेंगी। इन्हीं स्मृतियों को चिरस्थायी बनाने के उद्देश्य से अकोला गेट पर उनकी प्रतिमा स्थापित की गई है।

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