श्रीनगर , अक्टूबर 15 -- जम्मू कश्मीर में श्रीनगर की स्थानीय अदालत ने एक महिला की उसकी ससुराल में गला घोंटकर हत्या करने के मामले में पति, सास और देवर को दोषी ठहराया है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश फारूक अहमद भट की अदालत ने तस्लीमा की सास हफीजा बेगम, देवर परवेज अहमद डार (उर्फ बिलाल) और पति शाहनवाज अहमद डार को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या) और 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने दो अन्य आरोपियों सुमिया और सायका को 'संदेह का लाभ' देते हुए बरी कर दिया।

अदालत ने निर्देश दिया कि हफीजा बेगम, जो जमानत पर थीं, उन्हें हिरासत में लेकर श्रीनगर की केंद्रीय जेल भेज दिया जाये। तस्लीमा की मौत 27 जून 2022 को बेमिना की नूंद-रेशी कॉलोनी स्थित उसके ससुराल में हुई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार उसे बेमिना के जेवीसी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण दम घुटने की वजह से सांस रुकना बताया गया।

मौत से जुड़ी परिस्थितियों की प्रारंभिक जांच के बाद बटामालू थाना ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच की। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि तस्लीमा को वैवाहिक विवादों और बच्चे न होने के कारण प्रताड़ित किया जाता था और उसकी मौत की परिस्थितियां एक सोची-समझी साजिश की ओर इशारा करती हैं। अभियोजन पक्ष ने मेडिकल सबूतों, गवाहों के बयानों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और घटना से पहले व बाद में आरोपियों के व्यवहार को भी आधार बनाया। चूंकि इस हत्या का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था, इसलिए यह मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है।

अभियोजन पक्ष ने मुकदमे के दौरान 23 गवाहों से पूछताछ की। अदालत ने मेडिकल सबूतों, उन परिस्थितियों पर विचार किया जिनमें तस्लीमा की उसके ससुराल में मौत हुई थी और आरोपियों द्वारा अपने बयानों में दी गयी सफाई को भी देखा। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष ने ऐसी परिस्थितियों की एक पूरी और अटूट कड़ी पेश की है, जो हफीज़ा बेगम, परवेज़ अहमद डार और शाहनवाज़ अहमद डार के दोषी होने की ओर इशारा करती है। अदालत ने कहा कि ये परिस्थितियां उनके निर्दोष होने की किसी भी तर्कसंगत संभावना से मेल नहीं खातीं।

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