बिलासपुर , मार्च 12 -- छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने गुरुवार को भरण-पोषण से जुड़े एक मामले में फैसला देते हुए कहा कि यदि पत्नी बिना किसी ठोस कारण के पति और बच्चों को छोड़कर दूसरे पुरुष के साथ रहती है, तो उसे गुजारा भत्ता मिलने का अधिकार नहीं है।
उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की एकल बेंच ने निचली अदालत के आदेश को सही ठहराते हुए महिला की याचिका खारिज कर दी।
मामले में भिलाई की रहने वाली महिला ने अपने पति के खिलाफ भरण-पोषण की मांग की थी। महिला का कहना था कि वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पति की अनुमति से दिल्ली कोचिंग गई थी। उसने दावा किया कि पति का व्यवसाय अच्छा है और उसकी मासिक आय लगभग तीन लाख रुपए है, इसलिए उसे एक लाख रुपए मासिक गुजारा भत्ता दिया जाए।
वहीं पति ने अदालत में बताया कि 11 नवंबर 2022 को पत्नी बिना किसी जानकारी के घर छोड़कर चली गई थी। जाते समय उसने घर के गहने और दस्तावेज साथ ले लिए, जबकि अपने दो छोटे बच्चों को घर पर ही छोड़ दिया। इसके बाद पति ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई। जांच में पता चला कि महिला अपनी बहन और एक अन्य व्यक्ति के साथ हवाई जहाज से दिल्ली गई और वहां लगभग 10-11 दिन रही।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित