भरतपुर , मार्च 08 -- गर्मियों के आगमन और पतझड़ के बीच वृक्षों पर नयी कोपलों की बहार से राजस्थान के भरतपुर संभाग में ऐसा प्रतीत होता है, जैसे प्रकृति ने धरा के कैनवास पर कई तरह के रंगबिखेर दिए हों। ओस की बूंदों से भीगी घास पर सुबह शाखों से टूटकर गिरी बिखरी पीली-भूरी पत्तियां प्रकृति के बदलते मौसम की कहानी कह रही है। पेड़ों से झड़कर जमीन पर गिरी ये पत्तियां मानो धरती पर सुनहरी चादर बिछा रही हों। पेड़ अपने पुराने पत्तों को छोड़कर नई कोंपलों के लिए जगह बना रहे हैं। शाखों पर कोंपलें फूटना शुरू हो गया है।
सौंदर्य से भरा प्रकृति का यह बदलाव खुशनूमा होने के साथ लोगो को आनंदविभोर कर रहा हैं। पतझड़ का यह मौसम केवल पत्तों के झरने का नहीं, बल्कि प्रकृति के नए चक्र की शुरुआत का संकेत भी है। पुराने पत्तों के गिरने से मिट्टी को पोषण मिलता है और आने वाले समय में पेड़ों पर नई हरियाली लौटती है।
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