हरिद्वार , अक्टूबर 14 -- उत्तराखंड के हरिद्वार में भारतीय ज्ञान परंपरा, वैदिक चिंतन और राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से पतंजलि विश्वविद्यालय में 29 से 31 अक्टूबर तक 52वें अखिल भारतीय प्राच्यविद्या सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। एक शताब्दी से अधिक की गौरवशाली परंपरा वाले इस सम्मेलन में देश-विदेश के विद्वान, शिक्षाविद् और शोधार्थी भारतीय ज्ञान-विज्ञान के विविध आयामों पर विचार-विमर्श करेंगे।

बुधवार को आयोजन की तैयारियों को लेकर प्रति-कुलपति साध्वी डॉ. देवप्रिया के निर्देशन में बैठक आयोजित की गई। इसमें विभिन्न समितियों को आवश्यक व्यवस्थाएं समयबद्ध ढंग से पूरी करने के निर्देश दिए गए। सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण विशाल पुस्तक मेला और आकर्षक प्रदर्शनी स्टॉल होंगे। इनमें वेद, उपनिषद्, भारतीय दर्शन, संस्कृत साहित्य, योग, आयुर्वेद और प्राचीन भारतीय ज्ञान-विज्ञान से संबंधित पुस्तकों एवं शोध साहित्य को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके साथ ही उत्तराखंड की लोककला, हस्तशिल्प, पारंपरिक खान-पान और आध्यात्मिक विरासत की झलक भी देखने को मिलेगी।

सम्मेलन में वैदिक अध्ययन, बौद्ध एवं जैन दर्शन, पालि साहित्य, संस्कृत, भारतीय इतिहास, पुरातत्त्व, पांडुलिपि विज्ञान, प्राचीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा भारतीय ज्ञान प्रणाली जैसे विषयों पर शोधपरक चर्चा प्रस्तावित है। इसके अलावा संस्कृत और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), संगणकीय भाषाविज्ञान, प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति, भारतीय काव्यशास्त्र और बाल साहित्य जैसे समकालीन एवं पारंपरिक विषय भी अकादमिक विमर्श का हिस्सा होंगे।

कुंभ के सांस्कृतिक एवं दार्शनिक महत्त्व, भारतीय अनुसंधान पद्धतियों और विभिन्न एशियाई भाषाओं एवं सभ्यताओं के अध्ययन पर भी विद्वान अपने शोध और विचार प्रस्तुत करेंगे। आयोजन का उद्देश्य प्राचीन ज्ञान परंपराओं को आधुनिक अनुसंधान से जोड़ना और नई पीढ़ी को भारतीय विरासत से परिचित कराना है।

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