नयी दिल्ली , मार्च 11 -- रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने पड़ोसी देशों के साथ सहयोग की भारत की प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए कहा है कि वह आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की अपनी नीति पर दृढ़ता से कायम है।
श्री सेठ ने बुधवार को यहां मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ की ओर से उसके 25वें स्थापना वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी 'भारत के पड़ोस में बदलती परिस्थितियां' में मुख्य भाषण देते हुए यह बात कही।
भारत की सभ्यतागत भावना 'वसुधैव कुटुम्बकम्' का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत भगवान कृष्ण और छत्रपति शिवाजी की भूमि है, जहां करुणा और निर्णायक शक्ति का संतुलन है। उन्होंने इस संदर्भ में पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद किये गये 'ऑपरेशन सिंदूर' का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक सैन्य अभियान था, जिसने राष्ट्र के दृढ़ संकल्प को प्रदर्शित किया।
उन्होंने कहा कि 1947 के बाद हुए सभी युद्धों से अलग, ऑपरेशन सिंदूर विभिन्न स्वदेशी सैन्य प्लेटफॉर्मों के माध्यम से संचालित किया गया, जो रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की सफलता का एक शक्तिशाली प्रमाण है।
भारत के रक्षा औद्योगिक परिदृश्य में परिवर्तन का उल्लेख करते हुए श्री सेठ ने कहा कि रक्षा निर्यात वर्ष 2014 में 686 करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2025 में 23,622 करोड़ रुपये हो गया है। वर्ष 2026 के लिए इसका लक्ष्य 29,000 करोड़ रुपये और वर्ष 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है।
उन्होंने बताया कि रक्षा बजट अब तक के सर्वोच्च स्तर 7.85 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
रक्षा उत्पादन विभाग ने सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची के अंतर्गत 5,012 रक्षा घटकों में से 3,190 का स्वदेशीकरण कर लिया है।
रक्षा क्षेत्र में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों का विस्तार लगभग 2014 में एक करोड़ इकाइयों से बढ़कर आज 6.5 करोड़ इकाइयों तक हो गया है, जो लगभग 25 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान कर रहा है।
भारत का स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र भी वर्ष 2014 में लगभग 1,000 स्टार्टअप से बढ़कर 29 लाख से अधिक हो गया है, जिससे भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप देश बन गया है।
पड़ोसी देशों के साथ भारत के संबंधों पर टिप्पणी करते हुए रक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि बंगलादेश भारत का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है।
उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल इतिहास, संस्कृति और साझा सुरक्षा हितों से जुड़े हुए हैं और दोनों देश एक-दूसरे से अलग नहीं किये जा सकते।
भारत नेपाल को आधारभूत संरचना परियोजनाओं के माध्यम से सहयोग देता रहा है, जिनमें जनकपुर-कुर्था रेल संपर्क, जलविद्युत परियोजनाएं, ट्रॉमा केंद्र और मोतिहारी पाइपलाइन शामिल हैं।
इस कार्यक्रम के दौरान सैन्य क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर एक महत्वपूर्ण नीतिगत दस्तावेज भी जारी किया गया, जो राष्ट्रीय सुरक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के एकीकरण के लिए भारत की दूरदर्शी सोच को दर्शाता है। इसका उद्देश्य परिचालन क्षमता बढ़ाना, निर्णय लेने में श्रेष्ठता प्राप्त करना और जिम्मेदार नवाचार को प्रोत्साहित करना है।
कार्यक्रम में 'समाध' नामक प्रणाली का भी औपचारिक शुभारंभ किया गया। यह 'एरियल ड्रोन के लिए परिस्थितिजन्य जागरूकता' प्रणाली है, जिसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन की कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रोबोटिक्स केंद्र प्रयोगशाला द्वारा विकसित किया गया है।
समाध एक विस्तार योग्य और संप्रभु कृत्रिम बुद्धिमत्ता मंच है, जो युद्ध के पूरे दायरे में वास्तविक समय की परिस्थितिजन्य जानकारी प्रदान करता है, जिसमें स्वायत्त और समूह आधारित ड्रोन संचालन भी शामिल हैं।
इसके साथ ही 'एकीकृत ऑनलाइन प्रशिक्षण और मूल्यांकन कार्यक्रम' का भी शुभारंभ किया गया, जिसका उद्देश्य भारत के मध्य स्तर के सैन्य नेतृत्व में संयुक्त संचालन की सोच विकसित करना है।
इस कार्यक्रम में वरिष्ठ नीति-निर्माताओं, राजनयिकों, सैन्य नेतृत्व, रणनीतिक विशेषज्ञों और विद्वानों ने भाग लिया और भारत के विकसित होते सुरक्षा वातावरण तथा राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्थिरता पर उसके व्यापक प्रभावों पर चर्चा की।
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