चंडीगढ़ , सितंबर 15 -- पंजाब के सरकारी स्वास्थ्य क्षेत्र में मंगलवार को उस समय एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गयी जब सरकारी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी), पटियाला में पहली बार सफल किडनी प्रत्यारोपण किया गया है। इसके साथ ही यह उपलब्धि हासिल करने वाला यह पंजाब का पहला सरकारी मेडिकल कॉलेज बन गया है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने मंगलवार को पंजाब भवन में संवाददाता सम्मेलन में बताया कि किडनी प्रत्यारोपण की जटिल सर्जरी 10 सितंबर को सफलतापूर्वक की गयी। उन्होंने कहा कि इससे पहले राज्य में पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (पीआईएलबीएस), मोहाली में सफल लिवर प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू हो चुकी है।

डॉ. सिंह ने बताया कि पूरा उपचार और प्रत्यारोपण मुख्यमंत्री सेहत योजना (एमएमएसवाई) के तहत पूरी तरह नि:शुल्क किया गया और मरीज के परिवार को अपनी जेब से कोई खर्च नहीं करना पड़ा। उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों में इसी तरह की प्रक्रिया पर करीब आठ से 12 लाख रुपये तक खर्च हो सकता है। उन्होंने इसे पंजाब के सरकारी चिकित्सा क्षेत्र के इतिहास में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे अत्याधुनिक और जीवनरक्षक अंग प्रत्यारोपण की सुविधा आम लोगों तक सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के माध्यम से पहुंच सकेगी।

उन्होंने बताया कि 37 वर्षीय मरीज संगरूर जिले के नामोल गांव की रोमानापट्टी का निवासी है और वह मेम्ब्रेनोप्रोलिफेरेटिव ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस (एमपीजीएन) के कारण किडनी फेल्योर से पीड़ित था। दिसंबर 2025 से उसे सप्ताह में तीन बार नियमित हीमोडायलिसिस की आवश्यकता पड़ रही थी। उन्होंने बताया कि विस्तृत चिकित्सकीय जांच के बाद मरीज की 29 वर्षीय पत्नी ने स्वेच्छा से किडनी दान की। प्रत्यारोपण के बाद मरीज और उनकी पत्नी दोनों की हालत स्थिर है और वे ट्रांसप्लांट आईसीयू में चिकित्सकों की निगरानी में स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं।

प्रेस वार्ता के दौरान डॉ. बलबीर सिंह ने वीडियो कॉल के माध्यम से मरीज और उनकी पत्नी से बातचीत कर दोनों के स्वास्थ्य की जानकारी ली। उन्होंने प्रत्यारोपण टीम को भी बधाई दी। सर्जिकल टीम का नेतृत्व प्रो. सरबप्रीत सिंह ने किया, जिसमें प्रो. एचबीएस संधू और डॉ. सुप्रान शर्मा शामिल रहे। नेफ्रोलॉजी टीम का नेतृत्व डॉ. ठाकुरवीर कोहली और एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व डॉ. तनवीर कुंद्रा ने किया। कॉलेज के डायरेक्टर-प्रिंसिपल एवं मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. आरपीएस सिबिया भी टीम का हिस्सा रहे।

स्वास्थ्य मंत्री ने चंडीगढ़ स्थित पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर) के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो. विवेक लाल, रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी एवं रोटो-नॉर्थ के प्रमुख प्रो. आशीष शर्मा तथा पीजीआई के इम्यूनोपैथोलॉजी विभाग को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और प्रत्यारोपण कार्यक्रम स्थापित करने में सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि पीजीआई चंडीगढ़ के विशेषज्ञों ने जीएमसी पटियाला में रीनल ट्रांसप्लांट कार्यक्रम शुरू करने में प्रशिक्षण और मौके पर सर्जिकल पर्यवेक्षण के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।

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