बैतूल , सितंबर 17 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में ग्रामीण आबादी की जमीन के स्वामित्व अधिकार अभिलेख तैयार करने और पात्र लोगों को मुफ्त रजिस्ट्री की सुविधा देने का अभियान शुरू होते ही पटवारियों की हड़ताल से प्रभावित हो गया। शासन ने 17 सितंबर से जिले की 556 ग्राम पंचायतों में पहले चरण के शिविर लगाने की तैयारी की थी, लेकिन गुरुवार को कई पंचायत भवनों में कर्मचारी नहीं पहुंचे। कुछ पंचायत भवनों पर ताले लगे रहे। इससे रजिस्ट्री और अभिलेख तैयार करने का मैदानी काम शुरू नहीं हो सका।
जिले में करीब एक लाख 54 हजार स्वामित्व अधिकार अभिलेखों के पंजीयन का लक्ष्य है। अभियान के तहत पहले चरण के शिविर 17 से 19 सितंबर, दूसरे चरण के 24 से 26 सितंबर और तीसरे चरण के एक से तीन अक्टूबर तक प्रस्तावित हैं। राजस्व अभिलेखों और जरूरी दस्तावेजों की जांच के बाद पात्र हितग्राहियों को मुफ्त रजिस्ट्री की सुविधा दी जानी है।
पटवारी संघ ने योजना में रजिस्ट्री के काम में निष्पादक की भूमिका निभाने से इनकार किया है। संघ के जिलाध्यक्ष मोहनलाल धुर्वे के अनुसार रजिस्ट्री के बाद जमीन को लेकर भविष्य में कोई कानूनी विवाद होने पर उसकी जिम्मेदारी पटवारियों पर आने की आशंका है। संघ इसी भूमिका से पटवारियों को अलग करने की मांग कर रहा है।
हड़ताल के कारण पहले दिन गांवों में प्रस्तावित मैदानी गतिविधियां प्रभावित हुईं और ग्रामीण शिविरों में प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार करते रहे।
ग्रामीणों का कहना है कि ड्रोन सर्वे वाले क्षेत्रों में ही स्वामित्व अधिकार की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। कई परिवार 20-30 वर्षों से आबादी भूमि पर रह रहे हैं, लेकिन उनका सर्वे अब तक नहीं हुआ है। बडोरा निवासी दिनेश मालवीय ने बताया कि पट्टा या रजिस्ट्री नहीं होने से जमीन के आधार पर ऋण लेने में भी परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि पहले सर्वे और अभिलेख की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।
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