पटना , फरवरी 18 -- बिहार भवन निर्माण विभाग की ओर से राज्य की ऐतिहासिक धरोहर पटना संग्रहालय को उसके मूल स्वरूप को अक्षुण्ण रखते हुए पुराने भवनों के संरक्षण का कार्य किया जा रहा है।
परियोजना के दूसरे चरण में पुराने हेरिटेज भवनों के संरक्षण कार्य और दीर्घाओं को शामिल किया गया है।
पहले चरण में परिसर में ही दो नई दीर्घा - 'गंगा' और 'पाटली' का उद्घाटन किया जा चुका है। संग्रहालय के पुराने हेरिटेज भवन का संरक्षण का कार्य तेजी से किया जा रहा है और मूल संरचना को बिना क्षति पहुंचाए इसे आधुनिक स्वरूप से सुसज्जित किया जा रहा है। परियोजना का सिविल वर्क लगभग पूर्ण कर लिया गया है और इलेक्ट्रिकल वर्क अग्रिम चरण में है।
भवन निर्माण विभाग के सचिव कुमार रवि ने बुधवार को बताया कि हेरिटेज भवनों के संरक्षण कार्य में काफी सावधानी बरती जा रही है, जिससे प्राचीन संरचना को क्षति न पहुंचे। सुर्खी चूना जैसे पारंपरिक सामग्रियों का उपयोग किया जा है। उन्होंने बताया कि पुराने भवनों में प्रदर्श अधिष्ठापन के लिये आंतरिक कार्य प्रगति पर है। इसके अलावा प्रदर्श के कॉन्सेप्ट प्लानिंग का कार्य किया जा रहा है।
सचिव श्री रवि ने बताया कि संग्रहालय में शेष कार्यों को अगले छह महीने में पूर्ण करने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि कार्य की प्रगति और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए नियमित समीक्षा की जा रही है। हेरिटेज भवन के संरक्षित होने के बाद पटना संग्रहालय बिहार के गौरवशाली अतीत को अनोखे अंदाज में प्रस्तुत करेगा। परियोजना के विस्तारिकरण के अन्तर्गत संग्रहालय परिसर में गंगा दीर्घा एवं पाटली दीर्घा का निर्माण किया गया। इसके अतिरिक्त 2डी प्रेक्षागृह, अस्थायी प्रदर्शनी हॉल, संग्रहालय कार्यालय, संरक्षण प्रयोगशाला, 105 क्षमता का एक ऑडिटोरियम एवं कलाकृतियों को रखने के लिये आधुनिक तकनीक से युक्त भण्डार गृह का निर्माण भी किया गया है।
श्री रवि ने बताया कि गंगा दीर्घा में खुबसूरत कलाकृतियों एवं कलात्मक चित्रण के माध्यम से बिहार में गंगा की यात्रा को सात सांस्कृतिक क्षेत्रों से जाते हुए दर्शाया गया है। पाटली दीर्घा में पाटलिपुत्र के पूर्ण वैभव के बारे में मेगास्थनीज और फाह्यान जैसे यात्रियों के उद्धरणों को खुबसूरत कलाकृतियों एवं चित्रण के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है।
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