पटना , जून 21 -- राजधानी के गंगा तट पर विकसित किया जा रहा जेपी गंगा पथ समग्र उद्यान राज्य के शहरी विकास, पर्यटन संवर्धन, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। राज्य सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना गंगा के तट को विश्वस्तरीय सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित करते हुए पाटलिपुत्र की गौरवशाली विरासत को आधुनिक स्वरूप प्रदान करेगी।

प्रथम चरण में लगभग 06 किलोमीटर लंबे ग्रीन-पार्क कॉरिडोर का विकास किया जा रहा है। द्वितीय चरण में इसका विस्तार लगभग 26 किलोमीटर तक विकसित किया जाएगा, जिससे ऐतिहासिक पटना सिटी का क्षेत्र भी इससे जुड़ेगा। इससे गंगा तट के साथ एक, सतत एवं एकीकृत हरित-पर्यटन गलियारे का निर्माण होगा। विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने निर्देश दिया कि इस कॉरिडोर का विकास केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित न रहकर पर्यटन, संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और जनसुविधाओं के एकीकृत मॉडल के रूप में किया जाए।

परिकल्पना के अनुसार यह क्षेत्र केवल मनोरंजन स्थल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जल-आधारित पर्यटन, सांस्कृतिक आयोजनों, सार्वजनिक गतिविधियों, प्रकृति अवलोकन, स्थानीय उद्यमिता और विरासत आधारित पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनेगा। वाटर मेट्रो जेट्टी, पर्यटन घाट, गंगा चैनल, पटना हाट, वेस्ट-टू-वंडर पार्क, स्वतंत्रता सेनानी पार्क, बॉटनिकल गार्डन, बटरफ्लाई गार्डन और अन्य सार्वजनिक सुविधाएँ इसे एक बहुआयामी शहरी गंतव्य का स्वरूप प्रदान करेंगी।

गंगा पथ के किनारे विकसित की जाने वाली लगभग 50 दुकानों के लिए 'गंगा एवं पाटलिपुत्र थीम' पर आधारित एक विशिष्ट आइकॉन विकसित किया जाएगा। इसके चयन के लिए राज्यस्तरीय डिजाइन प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी, जिसमें प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार 51 हजार 21 हजार और 11हजार रूपये प्रदान किए जाएंगे।

विकास आयुक्त ने निर्देश दिया कि सम्पूर्ण क्षेत्र की पहचान गंगा एवं पाटलिपुत्र की ऐतिहासिक विरासत से जुड़ी हो तथा विकसित होने वाली संरचनाओं, साइनेज, सार्वजनिक स्थलों और दुकानों में बिहार की सांस्कृतिक पहचान स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो।

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