श्रीगंगानगर , अगस्त 31 -- राजस्थान में श्रीगंगानगर जिला कलेक्ट्रेट के नजदीक महाराजा गंगासिंह चौक स्थित जल संसाधन विभाग के द्वार पर ग्रामीण मजदूर किसान समिति (जीकेएस)द्वारा पांच अगस्त से चलाया जा रहा धरना 25 दिन बाद सोमवार को स्थगित कर दिया गया।

समिति के प्रदेश महासचिव संतवीरसिंह मोहनपुर और गंगनहर परियोजना के अध्यक्ष हरविंदर सिंह गिल ने बताया कि धरने के दबाव के कारण गंगनहर में पानी की स्थिति अपेक्षाकृत स्थिर रही, लेकिन बरसात न होने और पर्याप्त नहरी पानी न मिलने से इलाके की सावणी फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।

समिति के नेताओं ने कहा कि धरना स्थगित किया गया है, लेकिन पानी फिर से कम होता है, उतार-चढ़ाव शुरू होता है, 15 सितंबर तक गंगनहर की सफाई शुरू नहीं होती या पानी चोरी की पाइपें उखाड़ने की कार्रवाई दोबारा शुरू नहीं की जाती, तो आंदोलन फिर शुरू होगा।

इस बार बरसात न के बराबर हुई और नहरी पानी भी समय पर पर्याप्त मात्रा में नहीं मिला। नतीजा यह हुआ कि मूंग और ग्वार की फसल पूरी तरह खत्म हो गयी। गन्ने की फसल करीब आधी रह गयी है। गर्मी और पानी की कमी के कारण किन्नू के बागों में फल झड़ रहे हैं। नरमा (कपास) की फसल इस बार बीमारी से बची रही और शुरू में अच्छी दिख रही थी। किसानों ने मूंग-ग्वार बर्बाद होते देख नरमे को बचाने की कोशिश की, लेकिन लगातार पड़ रही गर्मी और पछवा हवा ने नरमे में भी खुश्की पैदा कर दी है।

जिन किसानों की नहर की डबल बारी खाली चली गयी, उनका नरमा बचाना भी मुश्किल हो गया है। कई जगह नरमा भी सूखता दिख रहा है। कुल मिलाकर सावणी की फसल शुरू में अच्छी होने के बावजूद बिना बरसात और बिना पर्याप्त नहरी पानी के बर्बाद हो गयी।

किसान नेताओं ने हैरानी जताई कि किसी भी राजनीतिक दल के एजेंडे में गंगनहर नहीं है। गंगनहर के कारण ही श्रीगंगानगर शहर और जिले के अन्य कस्बे बसे हैं, लेकिन शहरी निकाय चुनावों में गंगनहर का जिक्र तक नहीं हो रहा। पानी के बिना बर्बाद हुई फसलों पर भी पक्ष और विपक्ष दोनों चुप हैं। यह बहुत चिंता का विषय है।

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