नयी दिल्ली , मार्च 31 -- केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान छत्तीसगढ़, गुजरात, मध्य प्रदेश, पंजाब और सिक्किम के ग्रामीण स्थानीय निकायों को पंद्रहवें वित्त आयोग के अनुदान के रूप में 2461 करोड़ रुपये जारी कर दिये हैं।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार इसके अलावा, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा, सिक्किम और त्रिपुरा को रोके गये बद्ध और गैर-बद्ध अनुदानों के हिस्से भी जारी किये गये हैं। यह आवंटन विभिन्न वित्त वर्षों से संबंधित हैं और इनका उद्देश्य ग्रामीण स्थानीय शासन को और मजबूत करना है।
इसके अतिरिक्त, 12 पात्र जिला पंचायत, 23 पात्र प्रखंड पंचायत और 79 पात्र ग्राम पंचायत भी शामिल हैं, जिन्हें राशि वितरित की गयी है। केन्द्र सरकार पंचायती राज मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय (पेयजल एवं स्वच्छता विभाग) के माध्यम से ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए राज्यों को पंद्रहवें वित्त वर्ष के अनुदान जारी करने की अनुशंसा करती है, जिसे वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किया जाता है।
आवंटित अनुदान एक वित्तीय वर्ष में दो किस्तों में जारी किये जाते हैं। गैर-बद्ध अनुदानों का उपयोग पंचायती राज संस्थाओं/ ग्रामीण स्थानीय निकायों द्वारा संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में निहित उनतीस विषयों के अंतर्गत स्थान-विशिष्ट आवश्यकताओं के लिए किया जाएगा। इसमें वेतन और अन्य स्थापना लागत शामिल नहीं होता है। बद्ध अनुदानों का उपयोग (क) स्वच्छता और खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) स्थिति के रखरखाव के लिए किया जा सकता है, जिसमें घरेलू अपशिष्ट प्रबंधन एवं उपचार, विशेष रूप से मानव मल एवं मल कीचड़ प्रबंधन शामिल होना चाहिए, और (ख) पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण जैसी बुनियादी सेवाओं के लिए किया जा सकता है।
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