पटना , अगस्त 30 -- बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल(सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने रविवार को कहा कि पंडित राजकुमार शुक्ल ने चंपारण के किसानों की समस्याओं, विशेषकर नील की खेती से जुड़ी तिनकठिया प्रथा के खिलाफ आवाज उठाई और इस मुद्दे को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ने का प्रयास किया।

राज्यपाल ने बिहार विधान परिषद्, पटना के सभागार में आयोजित 'पंडित राजकुमार शुक्ल स्मृति समारोह-सह-लोकचिंतन स्थापना दिवस समारोह' को संबोधित करते हुए कहा कि महात्मा गाँधी को चंपारण लाने में पंडित राजकुमार शुक्ल की महत्वपूर्ण भूमिका थी। गाँधीजी से मिलने और उन्हें चंपारण आने के लिए आग्रह करने के लिए शुक्ल जी ने लगातार प्रयास किए। अंततः गाँधीजी चंपारण आए और वर्ष 1917 का चंपारण सत्याग्रह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक महत्वपूर्ण अध्याय बना।

श्री हसनैन ने कहा कि पंडित राजकुमार शुक्ल जैसे महान व्यक्तित्वों की प्रेरणादायी कहानियों को नई पीढ़ी तक पहुँचाना वर्तमान व्यवस्था की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि देश के स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्र निर्माण से जुड़ी ऐसी गाथाओं को बच्चों और युवाओं को सुनाया जाना चाहिए। सोशल मीडिया और अन्य आधुनिक माध्यमों के जरिए भी इन महान व्यक्तित्वों के योगदान को सामने लाने की आवश्यकता है।

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