श्रीगंगानगर , जून 19 -- राजस्थान में श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों सहित पश्चिमी राजस्थान के कई जिलों में पंजाब से इंदिरा गांधी नहर एवं अन्य सिंचाई परियोजनाओं में आ रहे दूषित पानी को लेकर उठे सवाल पर राज्य सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि दूषित पानी से कैंसर या अन्य किसी गंभीर बीमारी की कोई प्रामाणिकता अब तक सिद्ध नहीं हुई है।
श्रीकरणपुर विधायक और श्रीगंगानगर जिला कांग्रेस समिति के अध्यक्ष रुपिंदरसिंह रूबी ने बताया कि उन्होंने विधानसभा के नियम-295 के तहत विशेष उल्लेख प्रस्ताव के माध्यम से पूछे गये सवाल के जवाब में राज्य सरकार ने यह जवाब दिया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने जवाब में कहा है कि पंजाब के लुधियाना शहर का प्रदूषित जल बुड्ढा नाला के माध्यम से सतलुज नदी में प्रवाहित किया जा रहा है। साथ ही जालंधर, नकोदर और फगवाड़ा का सीवरेज जल एवं औद्योगिक अपशिष्ट भी सतलुज नदी में मिल रहे हैं। हरिके बैराज के माध्यम से यह पानी राजस्थान की नहरों में पहुंच रहा है।
राज्य सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए अंतरराज्यीय स्तर पर लगातार प्रयास किये हैं। पंजाब सरकार से निरंतर पत्राचार करके दूषित पानी रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की गयी है। सतलुज नदी के जल संग्रहण क्षेत्र में 53 सीवेज ट्रीटमेंट संयंत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है और नये संयंत्रों का निर्माण कार्य भी तेजी से चल रहा है।
राज्य सरकार ने कहा है कि-जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा श्रीगंगानगर जिले की नहर प्रणालियों से आने वाले पानी के सभी पैरामीटर की नियमित जांच की जा रही है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा उपलब्ध जानकारी के आधार पर स्पष्ट किया गया है कि दूषित जल से कैंसर या अन्य बीमारियों के कोई पुष्ट मामले आज तक सामने नहीं आये हैं।
राज्य सरकार ने कहा कि वह दूषित पानी की समस्या के स्थायी समाधान के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। इस मामले को अंतरराज्यीय बैठक में भी प्रमुखता से उठाया जा रहा है और पंजाब सरकार से सहयोग अनुरोध किया जा रहा है।
विधायक रुपिंदर सिंह रूबी द्वारा यह मुद्दा क्षेत्र के किसानों और आमजन की लंबे समय से चली आ रही चिंता के दृष्टिगत उठाया गया है। सरकार का आधिकारिक रुख साफ है कि फिलहाल स्वास्थ्य संबंधी कोई प्रमाणित खतरा नहीं पाया गया है, फिर भी निगरानी और समाधान की प्रक्रिया को और मजबूत किया जा रहा है।
यह जानकारी राज्य सरकार की विभागीय टिप्पणी के आधार पर जारी की गयी है।
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