चंडीगढ़, अगस्त 11 -- पंजाब सरकार ने नशे के खिलाफ अपनी मुहिम को स्कूल स्तर तक मजबूत करते हुए राज्य के 12 जिलों में 21,850 से अधिक शिक्षकों को नशा रोकथाम और विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित प्रशिक्षण देने का कार्यक्रम शुरू किया है।
कार्यक्रम की शुरुआत फाजिल्का और तरनतारन से हुई, जहां पिछले सप्ताह 800 से अधिक शिक्षकों ने कार्यशालाओं में हिस्सा लिया। ?पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ बलबीर सिंह ने मंगलवार को कहा कि इस वर्ष जनवरी में नौ जिलों के वरिष्ठ माध्यमिक और हाई स्कूलों के प्रिंसिपलों तथा हेडमास्टरों के लिए प्रशिक्षण आयोजित किया गया था। इसमें विशेष रूप से राज्य के सीमावर्ती जिलों पर ध्यान दिया गया था, जहां नशे की समस्या का खतरा अधिक माना जाता है।
इसके अलावा अमृतसर में एक पायलट शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें 2,800 से अधिक शिक्षकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के बाद 75 प्रतिशत से अधिक प्रतिभागियों ने स्वस्थ स्कूल वातावरण बनाने में योगदान देने के लिए प्रेरित महसूस करने की जानकारी दी थी।
इन पहलों के अनुभव के आधार पर अब प्रशिक्षण कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से फाजिल्का, तरनतारन, फिरोजपुर, गुरदासपुर, पठानकोट, श्री मुक्तसर साहिब, फरीदकोट, मोहाली, रूपनगर, कपूरथला, लुधियाना और पटियाला में विस्तारित किया गया है।
सरकार के अनुसार, शिक्षक अक्सर किसी छात्र में तनाव या परेशानी के शुरुआती संकेत देखने वाले पहले व्यक्ति होते हैं, लेकिन कई बार ऐसे व्यवहार को मानसिक स्वास्थ्य समस्या के बजाय अनुशासनहीनता समझ लिया जाता है। किशोरों में बढ़ती चिंता, तनाव और नशे के जोखिम को देखते हुए स्कूल स्तर पर समय रहते पहचान और सहायता उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है।
डॉ. सिंह ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को नशे की गिरफ्त में जाने से पहले मदद पहुंचाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि शिक्षक बच्चों के साथ काफी समय बिताते हैं और उनके व्यवहार में आने वाले बदलावों, अनुपस्थिति और भावनात्मक स्थिति को सबसे पहले पहचान सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण मॉड्यूल के माध्यम से शिक्षकों को किशोरावस्था से जुड़ी समस्याओं, मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक कल्याण के साथ-साथ नशे के खतरों के बारे में जानकारी दी जाएगी। शिक्षक छात्रों में तनाव और नशे के प्रति संवेदनशीलता के शुरुआती संकेतों को पहचानना, दंड के बजाय संवेदनशीलता के साथ प्रतिक्रिया देना और जरूरत पड़ने पर छात्रों को उचित सहायता से जोड़ना सीखेंगे।
डॉ. सिंह ने कहा कि किसी भी बच्चे को चुपचाप परेशानी झेलने या सामाजिक कलंक का सामना करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए और 'युद्ध नशेआं विरुद्ध' अभियान के तहत सरकार छात्रों को देखभाल और सहयोग उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
यह कार्यक्रम विभिन्न सरकारी विभागों के समन्वय से चलाया जा रहा है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद प्रशिक्षण के क्रियान्वयन को सामाजिक सुरक्षा एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से सुनिश्चित करेगी।
एक दिवसीय जागरूकता एवं क्षमता निर्माण सत्र अगस्त 2026 से चरणबद्ध तरीके से 12 जिलों में 500 से अधिक बैचों में आयोजित किये जाएंगे। विशेषज्ञ प्रशिक्षकों द्वारा मनो-सामाजिक दृष्टिकोण से नशे की समस्या, मानसिक स्वास्थ्य और विद्यार्थियों की सहायता से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशिक्षण को व्यवहार में उतारने के लिए प्रत्येक शिक्षक विद्यार्थियों और नशे के बीच एक प्रहरी की भूमिका निभाने की शपथ लेगा तथा प्रशिक्षण के बाद आने वाले सप्ताहों में छात्रों के साथ जागरूकता एवं मानसिक स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियां आयोजित करेगा।
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