चंडीगढ़ , मई 13 -- पंजाब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने बुधवार को राज्य सरकार से मांग की है कि राज्य के तीन लाख से अधिक कर्मचारियों और चार लाख पेंशनरों का लंबित महंगाई भत्ता (डीए) तुरंत जारी किया जाए।
श्री जाखड़ ने आरोप लगाया कि सरकार जनता को असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए नए-नए तरीके बना रही है। प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए पंजाब भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने सरकार को 30 जून तक कर्मचारियों और पेंशनरों को 15 हजार करोड़ रुपये डीए किश्तों और एरियर के रूप में जारी करने के निर्देश दिए थे लेकिन सरकार ने दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले अरविन्द केजरीवाल ने वादा किया था कि लोगों को नौकरी या हकों के लिए धरने नहीं देने पड़ेंगे और न ही पुलिस कार्रवाई झेलनी पड़ेगी लेकिन आज हालात जस के तस हैं।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि आजादी के बाद पहली बार कोई सरकार न केवल डीए देने से इनकार कर रही है, बल्कि डीए देने की व्यवस्था को ही अदालत में चुनौती दे रही है। उन्होंने कहा कि डीए कोई दान नहीं, बल्कि कर्मचारियों का अधिकार है। इसे बिना देरी जारी किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार, हरियाणा, चंडीगढ़ और राजस्थान में 60 प्रतिशत डीए दिया जा रहा है, जबकि पंजाब के कर्मचारियों को केवल 42 प्रतिशत डीए मिल रहा है।
श्री जाखड़ ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था बिगड़ने और कर्मचारियों को डीए न मिलने के कारण लोगों ने भाजपा को समर्थन दिया। पंजाब में भी ऐसे ही हालात बन रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भाजपा कर्मचारियों के हितों की रक्षा करेगी और डीए भुगतान सुनिश्चित करेगी।
एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि भाजपा किसी धमकी से डरने वाली नहीं है और पंजाब के लोगों की सुरक्षा पार्टी की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि पंजाब को मजबूत नेतृत्व की जरूरत है और यह काम केवल भाजपा कर सकती है।
उन्होंने दावा किया कि जैसे नक्सलवाद पर काबू पाया गया, उसी तरह पंजाब में गैंगस्टरवाद और नशे की समस्या भी खत्म की जाएगी। उन्होंने स्थानीय निकाय चुनाव बैलेट पेपर से कराने के फैसले का भी विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि हार के डर से पंजाब सरकार और राज्य चुनाव आयोग इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की जगह बैलेट पेपर से चुनाव करवाना चाहते हैं। भाजपा इस फैसले के खिलाफ राज्य चुनाव आयोग में याचिका दायर करेगी।
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