चंडीगढ़ , अगस्त 14 -- पंजाब के वन एवं वन्यजीव संरक्षण मंत्री लाल चंद कटारूचक ने शुक्रवार को कहा कि पंजाब वृक्ष संरक्षण विधेयक-2026 राज्य में हरित क्षेत्र बढ़ाने, पर्यावरणीय संतुलन बनाये रखने तथा पेड़ों की कटाई और पुनःरोपण को विनियमित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

श्री कटारूचक ने कहा कि हाल ही में पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र में पारित प्रस्तावित विधेयक का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने के साथ-साथ हरित आवरण बनाये रखना और मिट्टी का संरक्षण करना है। विधेयक के प्रावधानों के अनुसार शहरी क्षेत्रों में बिना अनुमति कोई व्यक्ति पेड़ नहीं काट सकेगा। पेड़ काटने की अनुमति मिलने पर प्रत्येक काटे गये पेड़ के बदले दो पेड़ लगाना और उनकी देखभाल करना अनिवार्य होगा। विधेयक के व्यापक उद्देश्य के तहत पेड़ों की संख्या बढ़ाने और हरित क्षेत्र के विस्तार पर जोर दिया गया है।

विधेयक के तहत राज्य के प्रत्येक क्षेत्र में एक नामित 'ट्री ऑफिसर' नियुक्त किया जाएगा। शहरी क्षेत्र में पेड़ काटने से पहले इस अधिकारी की अनुमति अनिवार्य होगी। अधिकारी को आवेदन पर 30 दिन के भीतर और मृत पेड़ के मामले में सात दिन के भीतर निर्णय लेना होगा। निर्णय के कारणों को जांच के बाद लिखित रूप में दर्ज करना भी आवश्यक होगा।

यदि कोई पेड़ किसी व्यक्ति या संपत्ति के लिए खतरा पैदा करता है तो उसे काटने की अनुमति देने से इनकार नहीं किया जा सकेगा। केवल मृत पेड़ या ऐसा पेड़, जो मानव हस्तक्षेप के बिना गिर गया हो, शहरी क्षेत्र में काटा जा सकेगा।

विधेयक में अवैध रूप से पेड़ काटने पर जुर्माने और पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का प्रावधान किया गया है। पहली बार उल्लंघन पर 10,000 रुपये, दूसरी बार 35,000 रुपये और तीसरी बार 50,000 रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकेगा। बिना अनुमति पेड़ काटने पर प्रति पेड़ 10,000 रुपये तक पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति भी देनी होगी।

विधेयक के अनुसार अनुमति प्राप्त व्यक्ति को पेड़ काटने के तीन महीने के भीतर नये पौधे लगाने होंगे। ऐसा नहीं करने पर ट्री ऑफिसर द्वारा जुर्माना लगाया जाएगा और लगातार अनुपालन न करने की स्थिति में यह जुर्माना 50,000 रुपये तक हो सकता है।

यदि पेड़ लगाने के लिए संबंधित भूमि पर जगह उपलब्ध नहीं है, तो ट्री ऑफिसर अन्य स्थान पर पौधे लगाने की अनुमति दे सकता है या आवेदक को राज्य के कोष में राशि जमा करने की अनुमति दे सकता है। ऐसे निर्णय के कारण अधिकारी को लिखित रूप में दर्ज करने होंगे। विधेयक राज्य की सभी नगर निकायों पर लागू होगा, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है क्योंकि गांवों में कृषि वानिकी की व्यवस्था प्रचलित है। जिन मामलों में ट्री ऑफिसर की अनुमति आवश्यक नहीं होगी, संबंधित एजेंसी को पेड़ काटने की सूचना 24 घंटे के भीतर ट्री ऑफिसर को देनी होगी।

विधेयक के प्रावधानों से छावनी क्षेत्रों, सैन्य स्टेशनों, वायुसेना स्टेशनों और रक्षा प्रतिष्ठानों में स्थित पेड़ों को बाहर रखा गया है। यह छूट सशस्त्र बलों की परिचालन आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए दी गयी है।

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