नयी दिल्ली , मई 12 -- केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मंगलवार को पंजाब विजिलेंस ब्यूरो में तैनात अधिकारियों के नाम पर रिश्वत मांगने और स्वीकार करने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।

यह मामला पंजाब के एक राज्य कर अधिकारी की शिकायत पर दर्ज किया गया था।

शिकायतकर्ता का आरोप था कि आरोपी विकास उर्फ विक्की गोयल और उसके बेटे राघव गोयल ने पंजाब के महानिदेशक (विजिलेंस) के कार्यालय में लंबित एक शिकायत को बंद करवाने के बदले 20 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी।

इसमें आरोप लगाया गया कि दोनों आरोपी पंजाब के डीजीपी विजिलेंस के रीडर ओपी राणा सहित वरिष्ठ विजिलेंस अधिकारियों के लिए मध्यस्थ के रूप में काम कर रहे थे और अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर रहे थे।

ओपी राणा ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता को आश्वासन दिया था कि रिश्वत की रकम मिलने के बाद मामला रफा-दफा कर दिया जायेगा।

सत्यापन के दौरान रिश्वत मांगे जाने के आरोपों की प्रथम दृष्टया पुष्टि हुई।

आरोपियों ने सौदेबाजी की और मांग को 20 लाख रुपये से घटाकर 13 लाख रुपये और ओपी राणा के लिए एक सैमसंग गैलेक्सी जेड फोल्ड-7 मोबाइल फोन कर दिया।

सोमवार को चंडीगढ़ में बिछाये गये जाल के दौरान आरोपियों के सहयोगी अंकित वाधवा को अन्य आरोपियों की ओर से शिकायतकर्ता से 13 लाख रुपये की रिश्वत और मोबाइल फोन लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया।

अभियान के दौरान नकदी और मोबाइल फोन बरामद कर लिये गये हैं।

अभियान के दौरान आरोपी राघव गोयल, विकास उर्फ विक्की गोयल और लोक सेवक ओपी राणा कथित तौर पर वहां निगरानी के लिए तैनात गनमैनों के सतर्क किये जाने के बाद मौके से फरार हो गये।

पीछा करने के बाद सीबीआई की टीम ने पंजाब-हरियाणा सीमा पर अंबाला के पास आरोपी राघव गोयल, विकास उर्फ विक्की गोयल और दो गनमैनों को दबोच लिया।

पंजाब के डीजीपी विजिलेंस के रीडर ओपी राणा हालांकि अब भी फरार हैं और उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास जारी हैं।

अब तक की गयी जांच से प्रथम दृष्टया इस साजिश में आरोपी ओपी राणा की सक्रिय संलिप्तता का खुलासा हुआ है।

मलोट में आरोपी राघव गोयल और विकास उर्फ विक्की गोयल के आवासीय परिसरों और चंडीगढ़ में ओपी राणा के आवास पर तलाशी ली गयी, जिसमें नौ लाख रुपये नकद और आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद हुए हैं।

जांच में यह भी सामने आया है कि ओपी राणा और इन निजी आरोपियों के बीच विजिलेंस से जुड़े लंबित मामलों की संवेदनशील जानकारी का आदान-प्रदान होता था।

सीबीआई अब इस व्यापक साजिश की जांच कर रही है, जिसमें रिश्वतखोरी के संभावित नेटवर्क और अन्य व्यक्तियों की भूमिका का पता लगाया जा रहा है।

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