चंडीगढ़ , अप्रैल 22 -- पंजाब के पूर्व शिक्षा मंत्री और विधायक परगट सिंह ने बुधवार को आरोप लगाया है कि आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा पंजाब को बिजली सरप्लस बताने का दावा पूरी तरह गलत साबित हो रहा है और राज्य गंभीर बिजली संकट से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विदेश दौरों में व्यस्त हैं, जबकि मंत्री सरकारी जमीन बेचने और अन्य कार्यों में लगे हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
श्री परगट सिंह के अनुसार, राज्य में बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच करीब 1500 मेगावाट का अंतर पैदा हो गया है, जो तापमान बढ़ने के साथ और बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि किसानों को भी पर्याप्त बिजली नहीं मिल रही है। उन्होंने बताया कि अप्रैल के तीसरे सप्ताह में ही भीषण गर्मी और हीटवेव के बीच शहरों और गांवों में 8 से 10 घंटे तक के अघोषित बिजली कट लगाए जा रहे हैं। लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, बठिंडा और पटियाला जैसे शहरों में स्थिति अधिक गंभीर है। यदि हालात ऐसे ही रहे तो रात के समय भी लंबे बिजली कट लग सकते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले एक सप्ताह में बिजली की मांग 6500 मेगावाट से बढ़कर 10,000 मेगावाट से अधिक हो गई है, लेकिन पावरकॉम इस मांग को पूरा करने में असफल रहा है। कृषि क्षेत्र को भी पर्याप्त बिजली आपूर्ति नहीं दी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए "ब्यूटीफिकेशन" के नाम पर अघोषित कट लगा रही है और उपभोक्ताओं को हेल्पलाइन के जरिए सही जानकारी भी नहीं दी जा रही।
श्री परगट सिंह ने यह भी कहा कि पावरकॉम के कुछ वरिष्ठ अधिकारी खुद मानते हैं कि 28 अप्रैल 2026 से पहले मांग को पूरा करना संभव नहीं है। धान की रोपाई शुरू होने के बाद बिजली की आपूर्ति कृषि क्षेत्र की ओर मोड़नी पड़ेगी, जिससे स्थिति और खराब हो जाएगी। उन्होंने मुख्यमंत्री के उस दावे पर भी सवाल उठाया, जिसमें कहा गया था कि पंजाब में बिजली कट नहीं होंगे और राज्य बिजली सरप्लस है। उन्होंने कहा कि सरकार पावरकॉम के घाटे को भी पूरा करने में विफल रही है। कोयला खदान खरीदने का प्रचार तो किया गया, लेकिन न तो खदान नजर आ रही है और न ही कोयला।
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