चंडीगढ़ , मई 30 -- पंजाब की पूर्व स्वास्थ्य मंत्री प्रो लक्ष्मीकांता चावला ने राज्य सरकार से 65 हजार से अधिक ग्रुप-सी और ग्रुप-डी के ठेका कर्मचारियों की तरह आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को भी नियमित करने की मांग की है।

प्रो. चावला ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग सहित विभिन्न सरकारी विभागों में हजारों कर्मचारी वर्षों से आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत सेवाएं दे रहे हैं। ये कर्मचारी सरकारी अस्पतालों, कार्यालयों और अन्य संस्थानों में नियमित कर्मचारियों की तरह कार्य करते हैं, लेकिन उन्हें नौकरी की सुरक्षा और अन्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को एजेंसियों के बदलने पर नौकरी छूटने का खतरा बना रहता है। इसके अलावा वेतन में देरी, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का सीमित लाभ और सेवा संबंधी अनिश्चितता जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद ये कर्मचारी पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की भूमिका का उल्लेख करते हुए प्रो. चावला ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान इन कर्मचारियों ने अग्रिम पंक्ति में रहकर महत्वपूर्ण योगदान दिया था। कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई, लेकिन आज भी वे स्थायी रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि जिस प्रकार पंजाब सरकार ने ठेका कर्मचारियों के नियमितीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण फैसला लिया है, उसी प्रकार आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के लिए भी एक स्पष्ट और ठोस नीति बनाई जाए। कर्मचारियों का मानना है कि चरणबद्ध तरीके से नियमितीकरण की प्रक्रिया अपनाकर हजारों परिवारों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जा सकती है।

उधर, कर्मचारी संगठनों ने कहा कि आउटसोर्सिंग कर्मचारी भी सरकारी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनकी सेवाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक विचार करेगी और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित