चंडीगढ़ , अक्टूबर 10 -- पंजाब प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर आम आदमी पार्टी (आप) के प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए शनिवार को कहा कि प्रदेश में एसआईआर की पूरी प्रक्रिया राज्य सरकार करा रही है और इसमें केंद्र सरकार की कोई भूमिका नहीं है फिर आप किसके खिलाफ प्रदर्शन कर रही है।
श्री ढिल्लों ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान और आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पहले ही आश्वासन दे चुके हैं कि पंजाब में किसी भी वैध मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया जायेगा। उन्होंने सवाल किया कि जब पार्टी के शीर्ष नेता ऐसा भरोसा दिला चुके हैं, तो चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करने का औचित्य क्या है। उन्होंने आरोप लगाया कि आप सरकार महंगाई भत्ते (डीए) के लंबित भुगतान, नशे की समस्या, गैंगस्टर गतिविधियों, बिगड़ती कानून-व्यवस्था और राज्य पर बढ़ते कर्ज जैसे मुद्दों पर उठ रहे सवालों का जवाब देने के बजाय प्रदर्शनों के जरिए जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने वर्ष 2015 के एक वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि उसमें केजरीवाल दिल्ली में 11 लाख से अधिक फर्जी या दोहरे मतदाताओं के होने का दावा करते दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि केजरीवाल ने उस समय ऐसे मतदाताओं की सूची चुनाव आयोग को सौंपने की बात भी कही थी। उन्होंने सवाल किया कि जब केजरीवाल पहले खुद मतदाता सूचियों में फर्जी नामों का मुद्दा उठा चुके हैं, तो अब एसआईआर के तहत मतदाताओं के सत्यापन और फर्जी नाम हटाने पर आपत्ति क्यों जता रहे हैं। उन्होंने पंजाब में नगर निगमों और नगर परिषदों के चुनावों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी उम्मीदवारों के नामांकन पत्र फाड़ने और उन्हें डराने-धमकाने जैसी घटनाओं ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किये थे। उन्होंने कहा कि पटियाला, मोगा और बाघा पुराना में नये सिरे से चुनाव कराने संबंधी उच्चतम न्यायालय के हालिया आदेशों ने भी राज्य में चुनावी प्रक्रिया के संचालन को लेकर गंभीर प्रश्न उठाये हैं।
श्री ढिल्लों ने आरोप लगाया कि आप सरकार अपनी विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए राजनीतिक प्रदर्शन कर रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग पार्टी के चुनावी वादों और उसके मौजूदा रुख के बीच अंतर देख रहे हैं। भाजपा नेता ने कहा कि लोकतंत्र केवल राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि लोगों के मतदान के अधिकार का सम्मान करने से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवालों का सामना कर रही आप को दूसरों पर सवाल उठाने से पहले अपने आचरण पर ध्यान देना चाहिए।
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