चंडीगढ़ , अप्रैल 09 -- पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) को पर्यावरण श्रेणी में उसके प्रोजेक्ट 'संकट से सफलता की ओर' पंजाब का स्वच्छ वायु परिवर्तन' के लिए स्कॉच सिल्वर अवार्ड 2025 से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार पराली प्रबंधन के प्रभावी प्रयासों और खेतों में आग लगने की घटनाओं में 92 प्रतिशत की कमी लाने के लिए दिया गया है।
पीपीसीबी की अध्यक्ष सुश्री रीना गुप्ता ने गुरुवार को कहा कि यह सम्मान 28 मार्च को नयी दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित 107वें स्कॉच शिखर सम्मेलन, 'गवर्नेंस ट्रांसफॉर्म्ड' के दौरान प्रदान किया गया। पिछले पांच वर्षों में, पंजाब ने विभिन्न विभागों के समन्वय से पराली जलाने की चुनौती से निपटने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। इसमें रीयल-टाइम मॉनिटरिंग (निगरानी) और प्रवर्तन के साथ-साथ दीर्घकालिक संरचनात्मक हस्तक्षेप शामिल रहे हैं, जैसे कि फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों का बड़े पैमाने पर वितरण। कस्टम हायरिंग सेंटरों को मजबूत करना। धान की पराली के एक्स-सिटू (खेत से बाहर) उपयोग में भारी वृद्धि, जो पीपीसीबीके सहयोग से 8.8 लाख टन प्रति वर्ष से बढ़कर 40 लाख टन सालाना से अधिक हो गयी है।
सुश्री रीना गुप्ता ने कहा, " हमें यह राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त करते हुए गर्व हो रहा है। यह एक जटिल पर्यावरणीय चुनौती को हल करने के प्रति पंजाब सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसका प्रभाव न केवल राज्य बल्कि पूरे भारत-गंगा के मैदानी इलाकों पर पड़ता है। यह उपलब्धि कई हितधारकों की निरंतर और सामूहिक कार्रवाई का परिणाम है।" प्रगति हालांकि काफी ठोस रही है, लेकिन राज्य इस गति को बनाये रखते हुए आने वाले वर्षों में पराली जलाने की समस्या को पूरी तरह समाप्त करने के लिए लक्षित कार्य योजनाओं पर काम करना जारी रखे हुए है। पंजाब इस क्षेत्र में अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल के रूप में उभर रहा है।
स्कॉच अवार्ड अत्यधिक प्रतिस्पर्धी माना जाता है, जिसमें मूल्यांकन की एक बहु-स्तरीय कठोर प्रक्रिया शामिल होती है। इसमें विस्तृत प्रस्तुति, विशेषज्ञ जूरी के सामने प्रेजेंटेशन और सार्वजनिक मतदान (पब्लिक वोटिंग) के दौर शामिल हैं। पीपीसीबी की इस पहल को देशभर के कई प्रभावशाली प्रोजेक्ट्स के बीच चुना गया, जो इसकी प्रभावशीलता और विस्तार की संभावनाओं को रेखांकित करता है।
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