चंडीगढ़ , सितंबर 13 -- पंजाब पुलिस ने पाकिस्तान सीमा से ड्रोन के जरिए होने वाली नशा तस्करी पर शिकंजा कसने के लिए तकनीकी निगरानी और जमीनी कार्रवाई का नेटवर्क मजबूत किया है। पुलिस ने रणनीतिक सीमा क्षेत्रों में तीन नए 'ड्रोन सेंस डी200 प्रो' उपकरण तैनात किए हैं तथा 147 पुलिसकर्मियों वाली 52 ड्रोन प्रतिक्रिया टीमों को सक्रिय किया है।
पुलिस प्रवक्ता ने रविवार को बताया कि सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के समन्वय में चलाए जा रहे अभियान से पंजाब में सीमा पार से तस्करी की जाने वाली हेरोइन की उपलब्धता में उल्लेखनीय कमी आई है। हालांकि, इसके साथ ही अन्य राज्यों से आने वाली दवा आधारित नशीली गोलियों और कैप्सूल की तस्करी नई बड़ी चुनौती बनकर उभरी है।
प्रवक्ता ने बताया कि पंजाब में नौ एंटी-ड्रोन प्रणालियां तैनात की जा रही हैं। इनमें अमृतसर, तरनतारन और फिरोजपुर में अगस्त 2025 से तीन 'बाज आंख' प्रणालियां काम कर रही हैं। तीन ड्रोन सेंस डी200 प्रो इकाइयां तीन सितंबर से सीमा जिलों में रणनीतिक स्थानों पर तैनात हैं, जो ड्रोन की गतिविधि और सामान गिराए जाने के संभावित स्थानों का पता लगाने में मदद कर रही हैं।
ड्रोन की सूचना मिलने पर 52 ड्रोन प्रतिक्रिया टीमें 147 पुलिसकर्मियों के साथ बीएसएफ के समन्वय में मौके पर पहुंचकर तलाशी और संदिग्धों की धरपकड़ करती हैं। इस व्यवस्था को 600 पुलिसकर्मियों वाले 64 दूसरे स्तर के नाकों और 585 स्थानों पर लगे 2,367 सीसीटीवी कैमरों से भी सहयोग मिल रहा है। सीमा क्षेत्र की ग्राम रक्षा समितियों को भी ड्रोन प्रतिक्रिया टीमों से जोड़ा गया है।
पुलिस के अनुसार, 'युद्ध नशे के विरुद्ध' अभियान के तहत एक मार्च 2025 से अब तक करीब 80 हजार लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 486 ड्रोन बरामद किए गए हैं। नशा नेटवर्क की आर्थिक गतिविधियों पर कार्रवाई के तहत 336 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्ति को फ्रीज किया गया है। ड्रोन बरामद कराने की सूचना देने वालों के लिए 25 हजार रुपये के इनाम की व्यवस्था है और चालू वर्ष में करीब दो करोड़ रुपये इनाम के रूप में दिए जा चुके हैं।
प्रवक्ता ने बताया कि पंजाब में नशीली दवाओं की बदलती तस्करी के पैटर्न में अब दूसरे राज्यों से आने वाली दवा आधारित नशीली दवाओं की भूमिका बढ़ी है। वर्ष 2025 से अब तक उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश से जुड़े खेपों से 11.54 लाख नशीली गोलियां और कैप्सूल बरामद किए गए हैं।
पुलिस के विश्लेषण के अनुसार, पंजाब में उपलब्ध करीब 80 प्रतिशत दवा आधारित नशीली दवाएं गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली और अन्य राज्यों से आने का अनुमान है। पुलिस ने कहा कि पहले पाकिस्तान सीमा के रास्ते आने वाली नशीली दवाओं का अनुपात अधिक था, लेकिन अब स्थिति में बदलाव आया है।
प्रवक्ता ने कहा कि पंजाब पुलिस संबंधित राज्यों के साथ इस मुद्दे को उठाएगी और दवा निर्माण इकाइयों के नियमन, बिक्री-खरीद तथा परिवहन की निगरानी मजबूत करने के लिए समन्वित कार्रवाई की जाएगी, ताकि नशीली दवाओं को पंजाब में पहुंचाने से रोका जा सके।
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