चंडीगढ़ , मई 02 -- ऑपरेशन 'गैंगस्टरां ते वार' के तहत पंजाब में गैंगस्टरों और उनके सहयोगियों की साजिशों पर प्रहार करते हुए पंजाब पुलिस अब पंजाब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम (पीएआईएस) के अंतर्गत वॉयस रिकग्निशन सिस्टम से लैस हो गयी है, जिससे विदेशों से संचालित विभिन्न गैंग नेटवर्क में घुसपैठ कर पंजाब के युवाओं को राज्य में गैरकानूनी गतिविधियों के लिए गुमराह करने वालों तक पहुंच बनायी जा सकेगी।

पीएआईएस के तहत एआई आधारित वॉयस रिकग्निशन सिस्टम तैयार किया गया है, जिसमें 84,000 से अधिक ज्ञात अपराधियों और संदिग्धों के वॉयस सैंपल का 'वॉयस बैंक' शामिल है। आवाज की पहचान से आगे बढ़ते हुए, पीएआईएस में 3,90,000 से अधिक अपराधियों का मजबूत आपराधिक डाटाबेस भी शामिल है, जिसमें गिरोह संबद्धताओं तथा फोनेटिक सर्च क्षमताएं उपलब्ध हैं। इसका उन्नत गैंग ट्री सर्च टूल जांच अधिकारियों को संगठित अपराध नेटवर्क की संरचना को दृश्य रूप में समझने में मदद करता है, जिससे सड़क स्तर के अपराधों को उनके अंतरराष्ट्रीय सरगनाओं से जोड़ा जा सकता है।

पंजाब से जुड़े करीब 60 कुख्यात गैंगस्टर कनाडा, अमेरिका, इटली और अन्य देशों से सक्रिय हैं। कानून प्रवर्तन एजेंसियां 'रिमोट कंट्रोल' उगाही के नये दौर से जूझ रही थीं, जहां एन्क्रिप्टेड ऐप्स और अंतरराष्ट्रीय वर्चुअल नंबरों के जरिए धमकियां दी जाती हैं।

पीएआईएस के साथ पंजाब पुलिस को 'गैंगस्टरां ते वार' अभियान को और मजबूत करने के लिए विस्तारित क्षमता मिली है, जिससे स्मार्ट और डाटा आधारित पुलिसिंग संभव हुई है। श्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार के तहत यह अभियान राज्य को गैंगस्टरों से सुरक्षित बनाने के अपने प्रारंभिक उद्देश्य में सफल रहा है और अब यह संगठित अपराध के प्रति सरकार की शून्य-सहनशीलता नीति को और मजबूत करेगा। एडीजीपी एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स ( एजीटीएफ) प्रमोद बान ने कहा, " वर्षों से विदेशों में बैठे गैंगस्टर तकनीक का दुरुपयोग कर सुरक्षित ठिकानों से उगाही रैकेट चला रहे थे। भगवंत मान सरकार के 'गैंगस्टरां ते वार' अभियान के तहत पीएआईएस एक शक्ति-वर्धक साबित हुआ है। हमारी एआई आधारित वॉयस मैचिंग तकनीक कुछ ही मिनटों में कॉल करने वाले की पहचान कर सकती है, जिससे हम तेजी और निर्णायक तरीके से कार्रवाई कर सकते हैं। "पीएआईएस अधिकारियों को अपराध होने से पहले रोकने में भी सक्षम बनाता है। हालिया अभियानों में विदेशी हैंडलरों और स्थानीय भर्ती युवकों के बीच डिजिटल संचार को ट्रैक कर लक्षित हत्याओं की योजनाओं को विफल किया गया, जिससे समय रहते गिरफ्तारियां हुईं और योजनाबद्ध हमले रोके गये। उन्होंने कहा, "पहले हम अक्सर अलग-अलग घटनाओं से निपटते थे। अब 'गैंगस्टरां ते वार' रणनीति के तहत पीएआईएस हमें पूरा तंत्र दिखाता है, कौन फंडिंग कर रहा है, कौन समन्वय कर रहा है और कौन वारदात को अंजाम दे रहा है। यह खुफिया आधारित दृष्टिकोण हमें केवल व्यक्तियों को गिरफ्तार करने के बजाय पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने में मदद कर रहा है।"इस क्षमता ने पंजाब पुलिस की एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) को केवल व्यक्तिगत अपराधियों ही नहीं बल्कि पूरे नेटवर्क को खत्म करने में सक्षम बनाया है, जिससे राज्य सरकार की कार्रवाई का प्रभाव और मजबूत हुआ है। समर्पित भगोड़ा ट्रैकिंग सेल भी पीएआईएस की खुफिया जानकारी का उपयोग कर इंटरपोल सहित वैश्विक एजेंसियों के साथ समन्वय कर विदेशों में छिपे गैंगस्टरों की पहचान और प्रत्यर्पण की दिशा में काम कर रहे हैं।

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