चंडीगढ़ , अप्रैल 09 -- पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री और गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने गुरूवार को आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की वित्तीय नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राज्य को लगातार कर्ज के जाल में धकेला जा रहा है।
श्री रंधावा के अनुसार, महज तीन महीनों में लगभग 9,500 करोड़ का कर्ज लेना सरकार की वित्तीय योजना की विफलता को दर्शाता है। इसमें अप्रैल में 4,000 करोड़, मई में 3,000 करोड़ और जून में 2,500 करोड़ का कर्ज शामिल है, जिसमें से 1,500 करोड़ की पहली किस्त पहले ही ली जा चुकी है। मीडिया रिपोर्टाेंं के मुताबिक, सरकार का वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 40,000 करोड़ उधार लेने का लक्ष्य है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यही स्थिति जारी रही, तो आने वाले वर्षों में पंजाब गंभीर वित्तीय संकट की ओर बढ़ सकता है। उन्होंने मांग की कि सरकार राज्य के कर्ज और वित्तीय स्थिति पर तुरंत एक 'श्वेत पत्र' जारी करे ताकि जनता को सच्चाई पता चल सके। उन्होंने यह भी आगाह किया कि पंजाब के लोगों के भविष्य को अल्पकालिक राजनीति और गैर-जिम्मेदाराना वित्तीय निर्णयों के लिए कुर्बान नहीं किया जाएगा। यदि आवश्यक हुआ, तो इस मुद्दे को अदालत में ले जाया जाएगा और संसद में भी उठाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पंजाब पहले से ही भारी कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है। उपलब्ध वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, राज्य का कुल कर्ज चार लाख करोड़ को पार कर चुका है और यदि इसी रफ्तार से कर्ज लिया गया तो यह जल्द ही 4.47 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है।
श्री रंधावा ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार पुराने कर्ज को चुकाने के लिए नया कर्ज लेने की नीति पर चल रही है। नए ऋणों का एक बड़ा हिस्सा पिछले कर्ज की किश्तों और ब्याज के भुगतान में इस्तेमाल हो रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह केवल आंकड़ों का मामला नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर पंजाब की जनता पर पड़ रहा है।
उन्होंने सरकार से सवाल किया कि हाल के महीनों में उधार लिए गए हजारों करोड़ रुपये का उपयोग कैसे किया गया है? यदि धन मुख्य रूप से सब्सिडी और पुराने ऋण के पुनर्भुगतान पर खर्च किया जा रहा है, तो यह राज्य को गहरे वित्तीय संकट में डाल सकता है।
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने सरकार पर अल्पकालिक राजनीतिक लाभ के लिए बड़े वादे करने और उन्हें पूरा करने के लिए लगातार कर्ज लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुफ्त बिजली जैसी योजनाएं और अन्य सब्सिडी सालाना हजारों करोड़ रुपये खर्च कर रही हैं, जिससे सरकारी खजाने पर भारी दबाव पड़ रहा है।
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