चंडीगढ़ , जुलाई 29 -- शिरोमणि अकाली दल (शिअद) की वरिष्ठ नेता एवं बठिंडा से सांसद हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से पंजाब में पिछले चार वर्षों के दौरान हुए 11 परीक्षा पेपर लीक मामलों की केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि इससे करोड़ों रुपये के कथित घोटाले का पर्दाफाश होगा और करीब पांच लाख प्रभावित छात्रों को न्याय मिल सकेगा।
बुधवार को जारी बयान में हरसिमरत बादल ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी सरकार पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच कराने में रुचि नहीं रखती, क्योंकि इससे उसके अपने मंत्रियों की जवाबदेही तय हो सकती है। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं ने युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है और दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए।
श्रीमती बादल ने आम आदमी पार्टी के इस दावे पर सवाल उठाया कि पिछले चार वर्षों में पंजाब में कोई पेपर लीक नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि 13 मार्च 2023 को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्वयं सोशल मीडिया पर यह स्वीकार किया था कि पंजाब स्टेट टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (पीएसटीईटी) का प्रश्नपत्र लीक हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आयीं, जिसमें कथित तौर पर प्रति अभ्यर्थी 13 लाख रुपये लेकर ब्लूटूथ उपकरणों के जरिए परीक्षा करायी गयी। उनके अनुसार सरकार ने अनियमितताओं को स्वीकार तो किया, लेकिन इसे पेपर लीक मानने से परहेज किया।
सांसद ने कहा कि शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग और पंजाब अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (पीएसएसएसबी) से जुड़ी भर्ती परीक्षाओं में गंभीर खामियां सामने आने के बावजूद किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या मंत्री के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गयी। उन्होंने शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह और मुख्यमंत्री भगवंत मान से नैतिक जिम्मेदारी लेने की मांग की।
श्रीमती बादल ने दावा किया कि पिछले चार वर्षों में 11 बड़े पेपर लीक या भर्ती अनियमितताओं के मामले सामने आये हैं। उन्होंने नायब तहसीलदार भर्ती, टीईटी परीक्षा, पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की 12वीं अंग्रेजी परीक्षा, कृषि विकास अधिकारी भर्ती तथा पीएसएसएसबी ग्रुप-बी अधिकारियों की भर्ती सहित कई मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि लाखों अभ्यर्थी इससे प्रभावित हुए हैं।
उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में पंजाब एवं हरियाणा न्यायालय को भी हस्तक्षेप करना पड़ा और आबकारी निरीक्षक भर्ती जैसी परीक्षाओं की प्रक्रिया पर रोक लगानी पड़ी।
श्रीमती बादल ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इन मामलों में केवल औपचारिक जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि दिसंबर 2025 के आबकारी निरीक्षक पेपर लीक मामले में विजिलेंस द्वारा मामला दर्ज किये जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जबकि फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा भी अभी तक रद्द नहीं की गयी है। उन्होंने कहा कि वह यह मुद्दा संसद में भी उठा चुकी हैं। उन्होंने परीक्षा पेपर लीक रोकने संबंधी संशोधन विधेयक का स्वागत किया, लेकिन कहा कि इसे छात्रों सहित सभी हितधारकों से चर्चा के बाद लाया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ कथित पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शन के दौरान श्रद्धालुओं को श्री बंगला साहिब गुरुद्वारा जाने से रोकने के प्रयासों की भी आलोचना की।
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