चंडीगढ़ , अप्रैल 14 -- पंजाब के पूर्व उप मुख्यमंत्री एवं सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) के नियमों में किये गये कथित बदलावों पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

उन्होंने केंद्र सरकार पर पंजाब की पारंपरिक भूमिका को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहाकि यह संघीय अधिकारों पर हमला है।

श्री रंधावा ने आम आदमी पार्टी की सरकार पर पंजाब के हितों की रक्षा करने में असफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने केंद्र सरकार से इस निर्णय पर तत्काल पुनर्विचार करने और पंजाब के हितों को पूरी तरह सुरक्षित रखने की अपील की। साथ ही उन्होंने संवाद, पारदर्शिता और संवैधानिक मर्यादा के माध्यम से समाधान निकालने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, " 'मेंबर (पावर)' पद, जो पहले प्रभावी रूप से पंजाब से जुड़े प्रतिनिधियों के लिए आरक्षित माना जाता था, को अखिल भारतीय कैडर के लिए खोलना अत्यंत चिंताजनक निर्णय है। यह पंजाब के जल संसाधनों पर उसके वैध अधिकारों के संरक्षण को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। "श्री रंधावा ने कहा कि ऐसे एकतरफा निर्णय केवल प्रशासनिक नहीं हैं, बल्कि संघीय सहयोग की संवैधानिकऔर भावनात्मक संरचना पर भी चोट करते हैं, विशेषकर ऐसे राज्य के लिए पंजाब जिसने देश की खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

उन्होंने चेतावनी दी कि बीबीएमबी में पंजाब की भूमिका को कमजोर करना किसानों और आम जनता में गहरी नाराज़गी पैदा कर रहा है, जो पहले से ही जल अधिकारों को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने संघीय सौहार्द बनाये रखने की अपील करते हुए कहा कि किसी भी राज्य को उसके वैध संसाधनों के अधिकार से वंचित महसूस नहीं होना चाहिए।

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