चंडीगढ़ , जुलाई 14 -- शिरोमणि अकाली दल पुनर-सुरजीत समेत पांच पंथक संगठनों ने मंगलवार को पंजाब के सभी जिलों में उपायुक्तों के माध्यम से केंद्रीय गृह मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर वर्ष 1980 से 1995 के दौरान पंजाब में हुई घटनाओं की निष्पक्ष जांच के लिए 'पंजाब ट्रूथ एंड अकाउंटेबिलिटी कमीशन' गठित करने की मांग की।

शिरोमणि अकाली दल पुनर-सुरजीत के महासचिव गुरप्रताप सिंह वडाला ने मंगलवार को कहा कि ज्ञापन के माध्यम से उस दौर में हुई घटनाओं की निष्पक्ष जांच कर मृतकों की वास्तविक संख्या और तथ्यों को सामने लाने की मांग की गयी है। उन्होंने आरोप लगाया कि फिल्म 'सतलुज' को लेकर कुछ लोग इसे हिंदू-सिख विवाद का रूप देने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि पंजाब ने वर्ष 1984 की त्रासदी के बावजूद सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखा था। उन्होंने कहा कि 'पंजाब-95' फिल्म शहीद जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन संघर्ष पर आधारित है, जिसमें कथित तौर पर लापता किये गये लोगों के मामलों को उठाया गया है। उनके अनुसार फिल्म में ऐसा कोई दृश्य नहीं है जो किसी समुदाय या देश के खिलाफ वैमनस्य फैलाता हो।

ज्ञापन में केंद्र सरकार से मांग की गयी है कि फिल्म 'पंजाब-95' को बिना किसी सेंसर कट के सिनेमाघरों में रिलीज करने की अनुमति दी जाये। संगठनों ने यह भी मांग की कि जसवंत सिंह खालड़ा हत्याकांड और अन्य मामलों में दोषी करार दिये गये उन पुलिसकर्मियों को जल्द गिरफ्तार कर दोबारा जेल भेजा जाये, जो पैरोल या रिहाई के बाद पिछले तीन वर्षों से फरार बताये जा रहे हैं।

यह ज्ञापन शिरोमणि अकाली दल पुनर-सुरजीत, इंटरनेशनल पंथक अकाली दल, यूनाइटेड अकाली दल, बेगमपुरा खालसा राज पार्टी और पंथक आजाद ग्रुप की ओर से संयुक्त रूप से सौंपा गया। इस दौरान विभिन्न संगठनों के बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और पदाधिकारी भी मौजूद रहे।

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