होशियारपुर , जुलाई 27 -- पंजाब के आम आदमी क्लिनिकों में कार्यरत डॉक्टरों, फार्मासिस्टों और क्लीनिकल सहायकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सोमवार से राज्यभर में ओपीडी सेवाएं अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दीं। कर्मचारियों ने नियमित नियुक्ति, बेहतर सेवा शर्तों और अन्य मांगों को लेकर विभिन्न जिलों में प्रदर्शन भी किए।

होशियारपुर में आम आदमी क्लिनिक संयुक्त मोर्चा, पंजाब के बैनर तले कर्मचारियों ने सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर धरना दिया। प्रदर्शन का नेतृत्व मेडिकल ऑफिसर डॉ. गुरशरण और क्लीनिकल असिस्टेंट गुरप्रीत कौर ने किया।प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग के साथ कई दौर की बैठकों तथा बार-बार ज्ञापन देने के बावजूद उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। उनका कहना था कि पंजाब के सभी 23 जिलों के सिविल सर्जनों, स्वास्थ्य सेवाएं निदेशक और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह को कई बार ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन अब तक कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई।

कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें एम्पैनलमेंट प्रणाली के तहत रखा गया है, जिसके कारण उनकी स्थिति दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों जैसी बनी हुई है। उनका कहना है कि उन्हें केवल कार्य दिवसों का ही वेतन मिलता है, जबकि रविवार और गांधी जयंती, गणतंत्र दिवस तथा स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय अवकाशों का भुगतान नहीं किया जाता। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें आकस्मिक अवकाश (सीएल) और चिकित्सा अवकाश (मेडिकल लीव) जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। कर्मचारियों का कहना है कि अवकाश लेने पर वेतन काट लिया जाता है और यदि कोई कर्मचारी तीन दिन बाद ड्यूटी पर वापस नहीं लौटता तो उसकी सेवाएं समाप्त कर दी जाती हैं।

संयुक्त मोर्चे ने मांग की कि एम्पैनलमेंट प्रणाली समाप्त कर आम आदमी क्लिनिकों में कार्यरत सभी मेडिकल ऑफिसरों, फार्मासिस्टों और क्लीनिकल सहायकों को स्वास्थ्य सेवाएं निदेशालय (डीएचएस), पंजाब के अधीन नियमित नियुक्ति दी जाए।

वैकल्पिक रूप से कर्मचारियों ने मरीज आधारित प्रोत्साहन राशि की भी मांग की है। इसके तहत मेडिकल ऑफिसरों को प्रति मरीज 80 रुपए , फार्मासिस्टों को 30 रुपए और क्लीनिकल सहायकों को 25 रुपए देने के साथ डीएचएस के तहत नियुक्ति पत्र जारी किए जाने की मांग की गई है।

संयुक्त मोर्चे ने क्लीनिकल सहायकों को उनकी योग्यता के अनुरूप एएनएम का पदनाम देने, भविष्य की सरकारी भर्तियों में अनुभव का लाभ और आयु सीमा में छूट प्रदान करने तथा प्रतिवर्ष 15 दिन के आकस्मिक और चिकित्सा अवकाश की सुविधा देने की भी मांग की है।

कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों को स्वीकार करते हुए सरकार अधिसूचना जारी नहीं करती, तब तक उनका आंदोलन और ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि इस दौरान आम जनता को होने वाली असुविधा की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।

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