अमृतसर , जुलाई 16 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता प्रो. सरचांद सिंह ख्याला ने गुरुवार को पंजाब सरकार पर बिजली व्यवस्था की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य की बिजली प्रणाली गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है, लेकिन भगवंत मान सरकार इसे गंभीरता से लेने के बजाय प्रचार में व्यस्त है।

प्रो. ख्याला ने कहा कि पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन (पीएसईबीईए) द्वारा पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर को लिखे पत्र ने सरकार के "रंगला पंजाब" के दावों की पोल खोल दी है। उन्होंने कहा कि यह किसी विपक्षी दल का आरोप नहीं, बल्कि विभाग के अपने इंजीनियरों की ओर से दी गयी चेतावनी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इंजीनियरों ने पत्र में स्टाफ की भारी कमी, आवश्यक सामग्री के अभाव, एसबीएस बिलिंग सिस्टम की विफलता, आईटी और ईआरपी प्रणाली की खामियां, 1912 कॉल सेंटर की खराब व्यवस्था, लंबित पदोन्नतियां और बढ़ते कार्यभार जैसी समस्याओं का उल्लेख किया है, जिससे बिजली व्यवस्था पर गंभीर दबाव बना हुआ है।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान को बताना चाहिए कि जब उनके अपने इंजीनियर लिखित रूप से बिजली प्रणाली पर बढ़ते दबाव की बात कर रहे हैं, तो सरकार ने अब तक इस संकट को दूर करने के लिए क्या कदम उठाये हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार किसी बड़े ब्लैकआउट, ग्रिड फेल होने या बिजली व्यवस्था के पूरी तरह चरमरा जाने का इंतजार कर रही है। प्रो. ख्याला ने कहा कि पंजाब जैसे सीमावर्ती और कृषि प्रधान राज्य में धान के सीजन के दौरान मजबूत बिजली व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की लापरवाही के कारण इंजीनियरों को पर्याप्त स्टाफ, संसाधन, तकनीकी सहायता और प्रशासनिक सहयोग नहीं मिल रहा है। ऐसे में यदि बिजली सेवाएं प्रभावित होती हैं तो इसकी पूरी नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी ने सत्ता में आने से पहले आधुनिक तकनीक, पारदर्शी प्रशासन और बेहतर सेवाओं का वादा किया था, लेकिन आज हालात यह हैं कि सरकार के अपने इंजीनियर ही व्यवस्था की खामियों और प्रशासनिक उदासीनता की लिखित शिकायत कर रहे हैं।

भाजपा ने मांग की कि पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन द्वारा उठाये गये सभी मुद्दों का समयबद्ध समाधान किया जाये। पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाये गये तो भविष्य में किसी भी बड़े बिजली संकट या व्यापक बिजली कटौती की जिम्मेदारी भगवंत मान सरकार की होगी।

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