चंडीगढ़ , अक्टूबर 29 -- पंजाब आम आदमी पार्टी (आप) के मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने गुरुवार को राज्य के जल अधिकारों के मुद्दे पर कांग्रेस और अकाली दल-भाजपा की पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल में भूजल का गिरता स्तर रोकने और नहर सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने दावा किया कि भगवंत मान सरकार के प्रयासों से पंजाब में नहर के पानी का उपयोग 21-22 प्रतिशत से बढ़कर करीब 88 प्रतिशत हो गया है।
यहां संवाददाता सम्मेलन में श्री पन्नू ने कहा कि विशेषज्ञ वर्षों से पंजाब में भूजल के तेजी से गिरते स्तर को लेकर चेतावनी दे रहे थे, लेकिन पिछली सरकारों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। उनके अनुसार, नहरों, छोटी नहरों और जल वितरिकाओं की उपेक्षा के कारण किसानों की भूजल पर निर्भरता बढ़ी और राज्य के भविष्य के जल संसाधनों पर दबाव पड़ा।
श्री पन्नू ने दावा किया कि पंजाब को 1960 तक नदी के पानी के लिए रॉयल्टी मिलती थी, लेकिन इसके बाद भुगतान बंद हो गया। उन्होंने कहा कि राज्य का नदी जल रॉयल्टी के रूप में 1.44 लाख करोड़ रुपये का वैध दावा है और राजस्थान पंजाब से पानी लेकर उसका आर्थिक लाभ उठा रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर पंजाब के हितों को ध्यान में रखते हुए कदम उठाने की मांग की।
श्री पन्नू ने सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर के इतिहास का उल्लेख करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और अकाली नेता प्रकाश सिंह बादल की सरकारों पर पंजाब के जल हितों से समझौता करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि पूर्ववर्ती सरकारों ने कुछ निजी हितों के लिए नहरों के ढांचे में बदलाव किए, जबकि राज्य की व्यापक जल सुरक्षा की अनदेखी की गई।
उन्होंने कहा कि 2022 में आप सरकार के सत्ता में आने के बाद नहरों से खेतों तक पानी पहुंचाने को प्राथमिकता दी गई।
उनके मुताबिक, मिट्टी में दब चुकी जल वितरिकाओं की पहचान की गई और किसानों के खेतों तक नहरी पानी पहुंचाने के लिए करीब 14 हजार किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई गई। उन्होंने दावा किया कि इससे भूजल पर निर्भरता कम करने और जलस्तर में सुधार लाने में मदद मिली है।
श्री पन्नू ने हाल में पंजाब विधानसभा में पारित जल अधिकारों से जुड़े प्रस्तावों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस ने इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सदन से वॉकआउट किया। उन्होंने कहा कि भाजपा भी इन प्रस्तावों पर चुप है और अकाली दल सहित अन्य दलों ने भी स्पष्ट रुख सामने नहीं रखा। उन्होंने केंद्र सरकार से 1994 के समझौते की समीक्षा करने और पंजाब को यमुना के पानी में उसका उचित हिस्सा देने की मांग की।
श्री पन्नू ने कहा कि जरूरत पड़ने पर इस विवाद का समाधान जल न्यायाधिकरण या उच्चतम न्यायालय के माध्यम से किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि पंजाब की सीमा में स्थित रूपनगर, हरिके और फिरोजपुर के प्रमुख जल नियंत्रण केंद्रों के प्रबंधन और रखरखाव पर राज्य का पूरा नियंत्रण होना चाहिए। पन्नू ने कहा कि पानी पंजाब की कृषि, अर्थव्यवस्थाऔर आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है तथा राज्य अपने वैध अधिकारों से समझौता नहीं कर सकता।
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