नयी दिल्ली , अप्रैल 27 -- दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा उच्च न्यायालय की न्यायाधीश को लिखे गए पत्र और उनके हालिया बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सोमवार को कहा कि केजरीवाल का पूरा रवैया 'न खाता न बही, केजरीवाल जो कहे वह सही' जैसा हो गया है।
श्रीमती गुप्ता ने पत्रकारों से कहा कि श्री केजरीवाल का आचरण ऐसा प्रतीत होता है मानो वह स्वयं ही वकील, गवाह और न्यायाधीश बन बैठे हों। यदि सब कुछ वही तय करेंगे तो फिर न्याय व्यवस्था की आवश्यकता ही क्या रह जाएगी? मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायिक संस्थाओं पर बार-बार सवाल उठाना और संवैधानिक व्यवस्थाओं को कटघरे में खड़ा करना उनकी कार्यशैली और मानसिकता का हिस्सा बन चुका है।
उन्होंने कहा कि अदालत में पेश न होने की बात करना और किसी न्यायाधीश पर सार्वजनिक रूप से आरोप लगाना न केवल अनुचित है, बल्कि यह न्याय व्यवस्था की गरिमा को भी ठेस पहुंचाता है। जिस व्यक्ति पर गंभीर आरोप हैं और आरोपपत्र दाखिल हो चुकी है, वह यदि यह कहे कि उसके खिलाफ निर्णय हो सकता है इसलिए न्यायाधीश या अदालत बदल दी जाए तो यह पूरी प्रक्रिया पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। उन्होंने यह भी कहा कि स्वयं की तुलना महात्मा गांधी और शहीद-ए-आजम भगत सिंह जैसे महान व्यक्तित्वों से करना अत्यंत आपत्तिजनक और शर्मनाक है। देश के इन महान नायकों के नाम का इस प्रकार उपयोग करना उनकी गरिमा का अपमान है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कोई स्वयं को निर्दोष बताता है तो उसे अदालत में अपने पक्ष को साबित करना चाहिए। बाहर बैठकर सत्याग्रह का दावा करना केवल एक 'घटिया मजाक' है, जिसे न तो जनता स्वीकार करती है और न ही न्याय व्यवस्था इसकी अनुमति देती है। उन्होंने यह भी कहा कि शोर मचाकर खुद को निर्दोष साबित करने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि सच्चाई का सामना अदालत में ही किया जाना चाहिए।
राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रहित में जो भी ईमानदार लोग आगे आकर देश निर्माण में योगदान देना चाहते हैं, उनका स्वागत किया जाना चाहिए। उन्होंने राघव चड्ढा व अन्य नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि जो लोग 'राष्ट्र प्रथम' की भावना से जुड़े हैं, उन्हें आगे बढ़ना चाहिए। जो लोग देश के प्रति सम्मान नहीं रखते, सेना का आदर नहीं करते और जनता के साथ विश्वासघात करते हैं, उन्हें समाज से अलग-थलग किया जाना चाहिए। देशहित सर्वोपरि है और सभी को मिलकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए।
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