बैतूल , सितंबर 03 -- मध्यप्रदेश में तबादलों से प्रतिबंध हटने के बाद जनजातीय कार्य विभाग द्वारा किए गए शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के प्रशासकीय तबादले कानूनी पेच में फंस गए हैं। विभाग द्वारा किए गए 133 प्रशासकीय तबादलों में से 71 कर्मचारियों को न्यायालय से स्थगन मिल चुका है। न्यायालय ने संबंधित मामलों पर पुनर्विचार कर निर्धारित अवधि में निराकरण के निर्देश दिए हैं। इसके बाद विभाग ने इन मामलों में सुनवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
प्रदेश सरकार ने मई में शासकीय कर्मचारियों के स्थानांतरण के लिए तबादला नीति जारी की थी और जून में तबादले किए गए थे। इसी क्रम में जनजातीय कार्य विभाग ने स्कूलों में पदस्थ शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के स्वैच्छिक एवं प्रशासकीय तबादले किए। इनमें 133 कर्मचारियों के प्रशासकीय आधार पर किए गए तबादले शामिल थे। इन आदेशों को लेकर तबादला नीति के पालन पर सवाल उठाए गए थे।
तबादला आदेश जारी होने के बाद प्रभावित कर्मचारियों ने न्यायालय की शरण ली। इनमें से 71 कर्मचारियों को न्यायालय से राहत मिली। स्थगन के चलते ये कर्मचारी फिलहाल अपनी पूर्व पदस्थापना वाली संस्थाओं में ही कार्यरत हैं। न्यायालय ने विभाग को इन मामलों का निर्धारित अवधि में निराकरण करने के निर्देश दिए हैं।
सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग वत्सला शिवहरे ने बताया कि न्यायालय से स्थगन प्राप्त सभी 71 कर्मचारियों की पहले दौर की सुनवाई पूरी की जा चुकी है। कर्मचारियों से उनकी पसंद के अनुसार अन्य पदस्थापना स्थलों के विकल्प मांगे गए हैं। विभाग इन विकल्पों के आधार पर संबंधित संस्थाओं में रिक्त पदों की स्थिति और वहां पदस्थापना की संभावना की जांच कर रहा है।
उन्होंने बताया कि जहां कर्मचारियों द्वारा दिए गए विकल्प के अनुसार पद रिक्त होंगे और पदस्थापना संभव होगी, वहां उन्हें पदस्थ किया जाएगा। सभी मामलों का निराकरण 30 कार्य दिवस के भीतर किया जाना है।
विभागीय स्तर पर ऐसी संभावना जताई जा रही है कि तबादला नीति के तहत पात्र कुछ कर्मचारियों के तबादला आदेश निरस्त किए जा सकते हैं। इनमें अधिमान्य कर्मचारी संगठनों के ब्लॉक, तहसील और जिला स्तर के अध्यक्ष, सचिव तथा कोषाध्यक्ष शामिल बताए जा रहे हैं। इसके अलावा तबादले के कारण पति-पत्नी की पदस्थापना अलग होने, गंभीर बीमारी से पीड़ित होने या सेवानिवृत्ति में दो वर्ष से कम समय बचने वाले कर्मचारियों के मामलों में भी तबादला निरस्त किए जाने की संभावना है।
एक ही तबादला प्रक्रिया के तहत आधे से अधिक कर्मचारियों को न्यायालय से स्थगन मिलने का मामला विभागीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी मामलों के निराकरण के बाद ही स्पष्ट होगा कि कितने तबादले निरस्त होते हैं और कितने कर्मचारियों को उनके विकल्प के आधार पर नई पदस्थापना मिलती है।
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