नैनीताल , अक्टूबर 07 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार और महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य से स्वर्गीय गिरधर सिंह बिष्ट के भाई कुलदीप सिंह बिष्ट की रिट याचिका पर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिये हैं।

याचिका के अनुसार चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के पद पर रहे गिरधर ने उत्तराखंड स्थानांतरण अधिनियम, 2017 की धारा 3(डी) के तहत गंभीर बीमारी के आधार पर याचिका दायर की थी, जिसमें राज्य मेडिकल बोर्ड द्वारा दिए गए अस्पष्ट चिकित्सा प्रमाण पत्र को चुनौती दी गई थी।

इस पर उच्च न्यायालय ने 19 फरवरी 2026 को अधिकारियों को निर्देश दिया था कि याचिकाकर्ता के उपस्थित होने के दो दिनों के भीतर पुनः उनकी स्वास्थ्य संबंधी जांच की जाए। हालांकि, 28 फरवरी 2026 को उपस्थित होने के बावजूद उन्हें नया प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया और 16 अप्रैल 2026 को बोर्ड ने फिर से अस्पष्ट प्रमाण पत्र जारी कर उसकी प्रति गिरधर को उपलब्ध नहीं कराई। यही नहीं अदालत के आदेशों की कथित रूप से अवहेलना करते हुए महकमे के अधिकारियों ने पांच मई 2026 को गिरधर का पुनः स्थानांतरण कर दिया। इस मानसिक और शारीरिक तनाव के कारण गिरधर अचेतावस्था (कोमा) में चले गए और अंततः उनका निधन हो गया।

उनके निधन के बाद भाई कुलदीप सिंह बिष्ट ने सूचना का अधिकार के माध्यम से चिकित्सा प्रमाण पत्र प्राप्त किया और उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। याचिकाकर्ता का आरोप है कि यदि महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य और संबंधित अधिकारियों ने अदालती आदेशों का पालन करते हुए संवेदनशीलता दिखाई होती, तो उनके भाई को इस दुखद स्थिति का सामना न करना पड़ता। इस आधार पर उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच और सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।

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