भुवनेश्वर , अक्टूबर 29 -- ओडिशा में बरहामपुर शहर की एक विशेष सतर्कता अदालत ने पुलिस उप-निरीक्षक भर्ती परीक्षा में बहुचर्चित नकदी के बदले नौकरी घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए 114 उम्मीदवारों को सशर्त ज़मानत दे दी है।

अब तक इस मामले में कथित संलिप्तता के लिए नौ बिचौलियों सहित 123 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। अदालत ने उन 114 उम्मीदवारों को ज़मानत दे दी, जिन्होंने परीक्षा पास करने के लिए घोटालेबाजों के साथ सांठगांठ की थी, जबकि नौ अन्य को ज़मानत नहीं दी गयी । इन उम्मीदवारों ने कथित तौर पर बिचौलियों को 10 लाख रुपये अग्रिम भुगतान किए थे जिन्हें नौकरी मिलने के बाद 15 से 20 लाख रुपये अतिरिक्त देने को कहा गया था।

अदालत ने 114 आरोपियों को 50,000 रुपये के ज़मानत बांड और प्रत्येक आरोपी के लिए दो दो ज़मानती पेश करने पर ज़मानत दे दी। इसके अलावा उन्हें आवश्यकतानुसार जाँच एजेंसियों के साथ जाँच में सहयोग करने के लिए भी कहा गया है।

गौरतलब है कि संयुक्त पुलिस सेवा परीक्षा, 2024 की लिखित परीक्षा पांच और छह अक्टूबर को होनी थी, लेकिन ओडिशा पुलिस भर्ती बोर्ड (ओपीआरबी) ने बरहामपुर में तीन बिचौलियों सहित 117 उम्मीदवारों की गिरफ्तारी के बाद इसे स्थगित कर दिया। बाद में अपराध शाखा ने भर्ती घोटाले के सिलसिले में छह और आरोपियों को हिरासत में लिया। अपराध शाखा की आपराधिक जाँच विभाग शाखा को मामले की जाँच सौंपी गई।

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने विपक्ष और नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों सहित कई हलकों की माँगों को देखते हुए 22 अक्टूबर को इस हाई-प्रोफाइल मामले की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की घोषणा की।

इस घोटाले के लिए मुख्य रूप से संदिग्ध निजी एजेंसियों को परीक्षा आयोजित करने की प्रक्रिया आउटसोर्स करने को दोषी ठहराया जा रहा है। इस व्यवस्था का मज़ाक उड़ाते हुए, षड्यंत्रकारियों ने इसे उम्मीदवारों से पैसे ऐंठने के एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। ये बिचौलिये परीक्षा से कुछ दिन पहले उम्मीदवारों को बसों में आंध्र प्रदेश के एक अज्ञात स्थान पर ले जा रहे थे ताकि उन्हें लीक प्रश्न पत्रों के आधार पर परीक्षा की अच्छी तैयारी में मदद मिल सके।

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