हैदराबाद , अक्टूबर 04 -- उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण(नालसा) के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने बच्चों के लिए सुरक्षित डिजिटल बचपन सुनिश्चित करने के मकसद से परिवारों, स्कूलों, टेक्नोलॉजी प्लेटफ़ॉर्म और न्याय संस्थानों को मिलाकर एक समन्वित दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया है।
न्यायमूर्ति नाथ ने हैदराबाद में दो दिवसीय नालयस दक्षिण क्षेत्र कॉन्फ्रेंस के समापन समारोह में बोलते हुए कहा कि बच्चों की सुरक्षा का दायरा डिजिटल दुनिया तक भी बढ़ना चाहिए, जहाँ बच्चों को ग्रूमिंग, साइबरस्टॉकिंग, पहचान की चोरी , तस्करी, साइबरबुलिंग और बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री के प्रसार जैसे खतरों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने रोकथाम, सुरक्षा, जांच, कानूनी सहायता और पुनर्वास की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
न्यायमूति नाथ ने क्षेत्रीय भाषाओं में जागरूकता के महत्व पर प्रकाश डाला और हेल्पलाइन तथा रिपोर्टिंग तंत्रों - जिनमें राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल, चाइल्डलाइन 1098, साइबर धोखाधड़ी हेल्पलाइन 1930 और नालसा हेल्पलाइन 15100 शामिल हैं - के व्यापक प्रचार-प्रसार का आग्रह किया।
उन्होंने गोपनीयता, बच्चों के अनुकूल कानूनी सेवाओं और पीड़ितों के लिए दीर्घकालिक परामर्श और पुनर्वास पर भी ज़ोर दिया।
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