अमृतसर , जुलाई। 09 -- उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश एम.एम. सुंदरेश ने श्री दुर्गियाना तीर्थ में गुरुवार को श्री दुर्गियाना मंदिर में माथा टेककर पूजा-अर्चना की।
इस अवसर पर श्री दुर्गियाना कमेटी की अध्यक्ष लक्ष्मीकांता चावला ने उनका स्वागत किया और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। मंदिर परिसर में हुई संक्षिप्त मुलाकात के दौरान प्रो. लक्ष्मीकांता चावला ने न्यायमूर्ति सुंदरेश के समक्ष विभिन्न सामाजिक विषयों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि उनके मत में लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी स्वीकार्यता मिलने से समाज में गलत संदेश गया है और इससे पारिवारिक मूल्यों तथा परिवार व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि बढ़ती हिंसा, महिलाओं के विरुद्ध अपराध और परिवारों के विघटन जैसे मुद्दों पर गंभीर मंथन की आवश्यकता है।
प्रो. चावला ने न्यायपालिका से महिलाओं के सम्मान से जुड़े मामलों पर विशेष ध्यान देने का आग्रह भी किया। उन्होंने कहा कि आम बोलचाल में महिलाओं के नाम पर अपमानजनक शब्दों और गालियों का प्रयोग उनकी गरिमा के विपरीत है। उनके अनुसार ऐसी प्रवृत्तियों पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि समाज में महिलाओं के सम्मान और समानता का संदेश मजबूत हो सके।
इस अवसर पर न्यायमूर्ति सुंदरेश ने मंदिर में देश की सुख-समृद्धि तथा न्याय व्यवस्था की मजबूती के लिए प्रार्थना की। कार्यक्रम में श्री दुर्गियाना कमेटी के संरक्षक डॉ राकेश शर्मा भी उपस्थित रहे।
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