रांची , मई 15 -- झारखंड के चर्चित पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह हत्याकांड में आखिरकार नौ वर्षों बाद पुलिस ने अनुसंधान बंद करते हुए मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में अंतिम प्रतिवेदन दाखिल कर दिया है।
सरायढेला थाना पुलिस द्वारा समर्पित रिपोर्ट में आरोपी गया सिंह को मृत बताया गया है, जबकि महंत पांडेय और मेयर संजीव सिंह के अनुज सिद्धार्थ गौतम उर्फ मनीष सिंह के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने की बात कही गई है। पुलिस ने साक्ष्य के अभाव का हवाला देते हुए मामले को बंद करने की अनुशंसा की है।
अदालत में दाखिल अंतिम प्रतिवेदन में पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी संतोष, मोनू तथा अन्य संदिग्धों के संबंध में लंबे समय तक जांच चलाने के बावजूद कोई ठोस सुराग नहीं मिल सका। पुलिस ने दोनों आरोपियों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को असत्यापित बताते हुए अंतिम रिपोर्ट न्यायालय में सौंप दी।
ज्ञातव्य है कि इस बहुचर्चित हत्याकांड में पुलिस पहले चार्जशीट और तीन पूरक चार्जशीट दाखिल कर चुकी थी। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने मेयर संजीव सिंह, संजय सिंह, पिंटू सिंह, डबलू मिश्रा, धनजी उर्फ धनंजय सिंह, कुर्बान अली, शिबू सिंह, चंदन सिंह उर्फ रोहित सिंह, विनोद सिंह, पंकज सिंह तथा धर्मेंद्र प्रताप सिंह उर्फ रिंकू सिंह को साक्ष्य के अभाव में रिहा कर दिया था।
धनबाद की राजनीति और अपराध जगत से जुड़े इस हाई-प्रोफाइल मामले के अनुसंधान बंद होने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है। कानूनी प्रक्रिया भले पूरी हो गई हो, लेकिन आम लोगों के मन में अब भी यह सवाल कायम है कि आखिर चार लोगों की हत्या किसने की थी। लोगों का कहना है कि इतने चर्चित मामले में जांच एजेंसियां मजबूत साक्ष्य जुटाने में क्यों विफल रहीं और क्या इस हत्याकांड की सच्चाई अब हमेशा के लिए दफन हो जाएगी।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद पीड़ित परिवार और समाज को अब भी न्याय का इंतजार है।
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