तिरुवनंतपुरम , सितंबर 20 -- केरल में एझिमाला स्थित भारतीय नौसेना अकादमी में अस्थायी कर्मचारी से जुड़ा कथित पहचान धोखाधड़ी मामला और विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी), थुंबा के पास कथित तौर पर एक अज्ञात ड्रोन देखे जाने की घटना ने राज्य के रणनीतिक प्रतिष्ठानों के लिए एकीकृत साइबर-फिजिकल सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत को उजागर किया है।

यह बात साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ के. एस. मनोज ने कही। इंटेलीग्रिड ईसीसी प्राइवेट लिमिटेड में सीपीएस सुरक्षा विशेषज्ञ मनोज ने कहा कि इन दोनों घटनाओं के आपस में जुड़े होने की जानकारी नहीं है और उपलब्ध जानकारी से जासूसी या किसी शत्रुतापूर्ण इरादे की पुष्टि नहीं होती है। हालांकि, ये घटनाएं कर्मचारियों, भौतिक सुरक्षा, डिजिटल सुरक्षा और कामकाज की सुरक्षा के बीच मौजूद कमजोरियों को लेकर व्यापक चिंता पैदा करती हैं।

उन्होंने कहा कि एझिमाला की घटना यह बताती है कि पहचान सुरक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। संवेदनशील प्रतिष्ठानों में सुरक्षा केवल भर्ती के समय दस्तावेजों की जांच तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पृष्ठभूमि की जांच, प्रवेश की अनुमति, न्यूनतम आवश्यक अधिकारों के आधार पर नियंत्रण, उपकरणों का प्रबंधन, ठेकेदारों की जांच और समय-समय पर दोबारा सत्यापन को लगातार चलने वाली सुरक्षा प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि किसी यूएवी (मानवरहित हवाई वाहन) को किसी प्रतिबंधित प्रतिष्ठान के अंदर प्रवेश करना जरूरी नहीं है। वह बाहर से भी वहां के बुनियादी ढांचे, आने-जाने के रास्तों, सुरक्षा व्यवस्था या कामकाज के तरीकों पर नजर रख सकता है। हालांकि, हर अज्ञात ड्रोन को दुश्मन नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संवेदनशील प्रतिष्ठानों में ड्रोन का पता लगाने, उसकी पहचान करने, उस पर नजर रखने, उससे पैदा होने वाले खतरे का आकलन करने और जरूरत के अनुसार कार्रवाई करने की उचित क्षमता होनी चाहिए।

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