नयी दिल्ली , मार्च 06 -- उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर के जेवर में स्थित नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (वाईआईएपीएल) को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) से एयरोड्रोम लाइसेंस मिल गया है।
नोएडा हवाई अड्डे से परिचालन शुरू होने की दिशा में यह एक और बड़ा कदम है। हवाई अड्डे को सभी मौसम में संचालन के लिए सार्वजनिक उपयोग श्रेणी के अंतर्गत लाइसेंस प्रदान किया गया है। इसका रनवे 10/28 इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) तथा एरोनॉटिकल ग्राउंड लाइटिंग (एजीएल) प्रणाली से लैस है जो इसे हर मौसम में दिन-रात उड़ानों के परिचालन के लिए योग्य बनाता है। रनवे 3,900 मीटर लंबा और 45 मीटर चौड़ा है।
हवाई अड्डे के निर्माण का पहला चरण पूरा हो चुका है। स्विटजरलैंड की कंपनी ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी वाईआईएपीएल इसका निर्माण कर रही है। इसे उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार के साथ सार्वजनिक निजी सहभागिता (पीपीपी) मॉडल के तहत विकसित किया गया है। इस परियोजना की 40 साल की रियायत अवधि 01 अक्टूबर 2021 से शुरू हुई है। इस हवाई अड्डे को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के विकल्प के रूप में तैयार किया जा रहा है जहां बोइंग 777-300ईआर जैसे बड़े विमान भी उतर सकते हैं।
पहले चरण में एक रनवे और एक टर्मिनल के साथ इस हवाई अड्डा की सालाना क्षमता लगभग 1.2 करोड़ यात्रियों की होगी। चार चरणों में पूरी तरह विकसित होने के बाद यह हवाई अड्डा प्रति वर्ष सात करोड़ यात्रियों की आवाजाही के लिए तैयार होगा। एक मल्टी-मॉडल कार्गो हब के साथ इसे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख हवाई संपर्क केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
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