नोएडा , अप्रैल 16 -- उत्तर प्रदेश के नोएडा में हाल ही में हुए श्रमिक असंतोष के दौरान पुलिस की भूमिका को लेकर कुछ संगठनों द्वारा भ्रामक तथ्य प्रसारित किए जाने के बीच नोएडा पुलिस ने स्थिति स्पष्ट करते हुए अपना पक्ष सामने रखा है। पुलिस का कहना है कि पूरे घटनाक्रम में उसकी भूमिका निष्पक्ष, संयमित और संवाद आधारित रही है।

पुलिस ने गुरुवार को विज्ञप्ति साझा करते हुए जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश सरकार इस मामले में शुरू से ही श्रमिकों के हितों के प्रति संवेदनशील रही है। सरकार द्वारा न्यूनतम वेतन में अंतरिम वृद्धि और मामले की गहन जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन इस प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

नोएडा पुलिस ने खुद को इस पूरे प्रकरण में एक "संवाद-सूत्रधार" के रूप में प्रस्तुत करते हुए श्रमिकों और प्रबंधन के बीच बातचीत का रास्ता खोलने का प्रयास किया। पुलिस का दावा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे किसी भी श्रमिक के खिलाफ बल प्रयोग नहीं किया गया और स्थिति को संभालने में पूरी सतर्कता बरती गई।

पुलिस ने हालांकि स्पष्ट किया कि कार्रवाई केवल उन्हीं व्यक्तियों के खिलाफ की गई है, जिन्होंने आंदोलन की आड़ में हिंसक गतिविधियों को अंजाम दिया। इनमें आगजनी, पथराव और सार्वजनिक व निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाएं शामिल हैं।

पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए कुछ आरोपी ऐसे भी हैं जो सीधे तौर पर हिंसा में शामिल नहीं थे लेकिन पर्दे के पीछे रहकर लोगों को भड़काने, संगठित करने और हिंसक गतिविधियों के लिए उकसाने का काम कर रहे थे। ऐसे कृत्य भारतीय न्याय संहिता के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आते हैं।

नोएडा पुलिस ने दोहराया कि वह श्रमिकों के वैध अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है लेकिन किसी भी प्रकार की हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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