नोएडा , अप्रैल 13 -- उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर नोएडा में पिछले कई दिनों से चल रहा फैक्ट्री कर्मचारियों का प्रदर्शन अब हिंसक रूप ले चुका है। वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे हजारों प्राइवेट कर्मचारी सोमवार को उग्र हो गए और कई जगहों पर तोड़फोड़, आगजनी और पथराव की घटनाएं सामने आई हैं।
प्रदर्शन की शुरुआत गुरुग्राम से हुई थी, जो धीरे-धीरे नोएडा की विभिन्न औद्योगिक इकाइयों तक फैल गई। आज हालात तब बिगड़ गए जब कुछ प्रदर्शनकारी समूहों ने फैक्ट्रियों के बाहर खड़ी गाड़ियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया।
नोएडा सेक्टर 62 स्थित मदरसन ग्रुप की फैक्ट्री के बाहर प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने जमकर हंगामा किया। गाड़ियों के शीशे तोड़े गए, कई वाहनों में आग लगा दी गई और पुलिस पर पथराव भी किया गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि इस बार उनकी वेतन बढ़ोतरी मात्र ढाई सौ से तीन सौ रुपये किया गया, जो महंगाई के मुकाबले बेहद कम है। उनकी मांग है कि न्यूनतम वेतन अठारह-बीस हजार रुपये प्रति माह तय किया जाए।
मजदूरों का आरोप है कि वर्तमान में नोएडा की फैक्ट्रियों में औसत वेतन 10-15 हजार रुपये के बीच है, जो जीवन यापन के लिए पर्याप्त नहीं है। वहीं, एनसीआर क्षेत्र में निर्माण कार्य से जुड़े मजदूरों को लगभग 700 रुपये प्रतिदिन मिलते हैं, जो महीने में करीब 21 हजार रुपये के बराबर होता है।
जानकारी के मुताबिक, हजारों की संख्या में कर्मचारी पिछले कई दिनों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन आज स्थिति अचानक बेकाबू हो गई। कई औद्योगिक क्षेत्रों में कंपनियों के बाहर तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं सामने आई हैं।
घटनाओं के बाद पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और हालात पर कड़ी नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
नोएडा जैसे बड़े औद्योगिक केंद्र में इस तरह के हिंसक प्रदर्शन से औद्योगिक शांति पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन अब मजदूरों और कंपनी प्रबंधन के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है।
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