नोएडा , मई 13 -- उत्तर प्रदेश में नोएडा के फेस वन थाना पुलिस ने बड़ी साइबर ठगी का खुलासा करते हुए एक फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने बैंक क्रेडिट कार्ड विभाग का कर्मचारी बनकर लोगों से ठगी करने वाले दो साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी लोगों को क्रेडिट कार्ड केवाईसी अपडेट करने और रिवॉर्ड प्वाइंट रिडीम कराने का झांसा देकर उनके मोबाइल फोन में फर्जी (एपीके) फाइल इंस्टॉल कराते थे और फिर बैंकिंग जानकारी हासिल कर धोखाधड़ी को अंजाम देते थे।
पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पुलिस ने 12 मई को लोकल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से सेक्टर-2 स्थित बिल्डिंग नंबर सी-90 की चौथी मंजिल पर संचालित फर्जी कॉल सेंटर पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
जांच में सामने आया कि आरोपी खुद को एयू बैंक, एक्सिस बैंक और अन्य बैंकों के क्रेडिट कार्ड विभाग का कर्मचारी बताकर ग्राहकों को कॉल करते थे। वे (केवाईसी) अपडेट करने और क्रेडिट कार्ड रिवॉर्ड प्वाइंट रिडीम कराने का लालच देकर लोगों के मोबाइल फोन में बैंकिंग ऐप जैसी दिखने वाली (एपीके) फाइल इंस्टॉल कराते थे। इसके बाद पीड़ितों से क्रेडिट कार्ड नंबर, सीवीवी और अन्य गोपनीय जानकारी भरवा ली जाती थी।
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि एपीके फाइल इंस्टॉल होने के बाद ट्रांजेक्शन से जुड़ा ओटीपी सीधे उनके मोबाइल पर पहुंच जाता था। इसके जरिए आरोपी ब्लिंकिट, ज़ेप्टो जैसे ऐप्स से गोल्ड और सिल्वर कॉइन खरीदते थे। बाद में उन सिक्कों को बेचकर रकम हासिल की जाती थी। आरोपी कुछ समय बाद इस्तेमाल किए गए सिम कार्ड तोड़कर फेंक देते थे और सामान की डिलीवरी किसी भी रैंडम पते पर मंगवाते थे ताकि पुलिस तक पहुंचना मुश्किल हो सके।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ठगी में इस्तेमाल किए गए तीन मोबाइल फोन, धोखाधड़ी से खरीदे गए दो पीली धातु के सिक्के और दो सफेद धातु के सिक्के बरामद किए हैं।, बरामद मोबाइल नंबरों के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों में एनसीआरपी पोर्टल पर 20 से अधिक शिकायतें दर्ज हैं।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विकास कुमार निवासी हापुड़ और सूरज निवासी हाथरस के रूप में हुई है। विकास कुमार के खिलाफ पहले भी थाना सेक्टर-63 में धोखाधड़ी और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज है।
इस मामले में फेज-वन थाना में मुकदमा दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता और सूचना सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और नेटवर्क की जांच में जुटी है।
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