ग्रेटर नोएडा , मई 09 -- उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित जेवर में बने नोएडा अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट तक यात्रियों की आवाजाही को सुगम और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ी पहल की गई है। एयरपोर्ट के लिए एक जून से पांच हाइड्रोजन बसें चलाने की तैयारी शुरू कर दी गई है।

उत्तर प्रदेश रोडवेज ने बसों के संचालन को लेकर अपनी सहमति दे दी है। इन बसों का संचालन एयरपोर्ट से ग्रेटर नोएडा, नोएडा और दिल्ली के प्रमुख स्थानों तक किया जाएगा।

यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक द्वारा शनिवार को यह जानकारी देते हुए बताया गया कि, यीडा के अधिकारियों के साथ शुक्रवार को सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (एआरएम) एमके सिंह समेत परिवहन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक हुई, जिसमें बसों के रूट और संचालन व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में तय किया गया कि हाइड्रोजन बसें एयरपोर्ट से ग्रेटर नोएडा के परी चौक, नोएडा के बॉटनिकल गार्डन और सिटी सेंटर के अलावा दिल्ली के मयूर विहार और अक्षरधाम तक चलाई जाएंगी। इससे दिल्ली-एनसीआर के यात्रियों को एयरपोर्ट तक सीधी और सुगम कनेक्टिविटी मिलेगी।

इन बसों को एनटीपीसी उपलब्ध कराएगा। प्रत्येक बस में करीब 45 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी। खास बात यह है कि एक बार हाइड्रोजन भरने पर बस लगभग 600 किलोमीटर तक चल सकेगी, जिससे यह लंबी दूरी के लिए भी किफायती और पर्यावरण के अनुकूल साबित होगी।

यीडा के एसीईओ राजेश कुमार ने बताया कि यूपी रोडवेज के अधिकारियों के साथ हाइड्रोजन बसों के संचालन को लेकर सकारात्मक बातचीत हुई है और विभाग ने इस परियोजना के लिए सहमति जता दी है। एयरपोर्ट शुरू होने के साथ ही इन बसों का संचालन भी शुरू कर दिया जाएगा।

इसके अलावा यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और उत्तराखंड के परिवहन विभागों से भी समझौता किया है। उड़ान सेवाएं शुरू होते ही इन राज्यों की बस सेवाएं भी एयरपोर्ट तक संचालित की जाएंगी, जिससे दूरदराज क्षेत्रों के यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा।

परियोजना की सबसे अहम विशेषता इसका पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा होना है। एनटीपीसी ग्रेटर नोएडा स्थित अपने प्लांट में बसों के लिए हाइड्रोजन ईंधन तैयार करेगी। यह हाइड्रोजन शोधित किए गए गंदे पानी से बनाई जाएगी। माना जा रहा है कि एयरपोर्ट शुरू होने के बाद क्षेत्र में यातायात का दबाव काफी बढ़ेगा। ऐसे में हाइड्रोजन बसें प्रदूषण कम करने और हवा को साफ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

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