नोएडा , अप्रैल 27 -- लोकतांत्रिक अधिकार संगठन 'जन हस्तक्षेप' ने नोएडा में मजदूर आंदोलन के दौरान हुए पुलिस दमन, सामूहिक गिरफ्तारियों, और श्रमिकों के कानूनी अधिकारों के हनन की कड़ी निंदा करते हुए सभी गिरफ्तार मजदूरों और कार्यकर्ताओं को तुरंत रिहा करने की मांग की है।

संगठन ने यह मांगे इस चर्चित मामले की अपनी एक स्वतंत्र जांच कमेटी 'तथ्यान्वेषी समिति' की सिफारिशों के आधार पर की है। संगठन ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन को सौंपी गयी मांगों में कहा है कि इस आंदोलन से जुड़े मजदूरों और कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर तुरंत वापस ली जाएं। एक अप्रैल से घोषित 21 प्रतिशत बढ़े हुए वेतन का भुगतान सुनिश्चित हो और नोएडा में प्रचलित ठेका मजदूरी व्यवस्था खत्म करके कंपनियों को सीधे रोजगार देने के निर्देश दिए जाएं। सभी औद्योगिक इकाइयों और मजदूरों का एक आधिकारिक पंजीकरण तैयार हो और विवादास्पद 'चार श्रम संहिताओं' को निरस्त कर पुराने श्रम कानूनों को लागू किया जाए।

जांच कमेटी की रिपोर्ट तैयार करने वाली टीम में उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता एस.एस. नेहरा, हिंदू कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर ईश मिश्रा, सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी अशोक शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार अनिल दुबे और वरिष्ठ अधिवक्ता एम.जेड. अली शामिल थे।

टीम ने पाया कि नोएडा में मजदूरों का असंतोष लंबे समय से कम वेतन, आसमान छूती महंगाई और हरियाणा की तुलना में वेतन वृद्धि न होने के कारण बढ़ रहा था।एक गारमेंट कंपनी से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन पुलिस ने बल प्रयोग कर इसे हिंसक बना दिया।

रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने 30,000 से अधिक प्रदर्शनकारी मजदूरों पर लाठीचार्ज किया और 1,000 से अधिक लोगों को अवैध रूप से हिरासत में रखा। कई मजदूरों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए और उनके परिवारों को उनकी स्थिति की जानकारी नहीं दी गई।

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