अमृतसर/ओस्लो , अक्टूबर 26 -- श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने नॉर्वे में सिख समुदाय से एकजुटता बनाए रखने, बच्चों की सिख पहचान की रक्षा करने और उन्हें बचपन से ही गुरबाणी तथा सिख सिद्धांतों से जोड़ने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि विदेशों में रहने वाले सिख परिवारों को अपनी धार्मिक पहचान कायम रखने के साथ पंजाब से अपने संबंध भी मजबूत बनाए रखने चाहिए।
ज्ञानी गड़गज्ज ने सोमवार को ओस्लो स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु नानक देव जी में बाबा बुड्ढा जी के जन्मदिवस को समर्पित गुरमत समागम में संगत को संबोधित करते हुए ये विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का आयोजन गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने संगत के सहयोग से किया था। उन्होंने बाबा बुड्ढा जी के जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने श्री गुरु नानक देव जी से लेकर श्री गुरु हरगोबिंद साहिब तक छह गुरु साहिबानों की सेवा की। उन्होंने छठे गुरु को मीरी-पीरी की दो तलवारें धारण करवाईं और उन्हें शस्त्र विद्या भी सिखाई। उन्होंने संगत से बाबा बुड्ढा जी के जीवन से प्रेरणा लेकर गुरु घर की सेवा और सिख सिद्धांतों के प्रति समर्पित रहने का आह्वान किया।
जत्थेदार ने कहा कि नॉर्वे दौरे के दौरान उन्हें जानकारी मिली कि कुछ सिख परिवारों के बच्चों को स्कूलों में अपने केश बनाए रखने के कारण दूसरे समुदायों के बच्चों की ओर से परेशान किए जाने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में स्थानीय गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटियों, सिख नेताओं और संगत को मिलकर नॉर्वे के शिक्षा विभाग तथा संबंधित स्कूल प्रशासन से बातचीत करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि दूसरे समुदायों के बच्चे भी बच्चे हैं और उन्हें प्रेम तथा समझदारी से जागरूक किया जाना चाहिए। स्कूलों और शिक्षा अधिकारियों को सिख धार्मिक पहचान के महत्व से अवगत कराकर इस समस्या का समाधान खोजा जा सकता है। उन्होंने कहा कि केश सिख पहचान और पांच ककारों का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसलिए बच्चों में यह भावना पैदा नहीं होनी चाहिए कि सिख पहचान बनाए रखने से उन्हें किसी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
ज्ञानी गड़गज्ज ने कहा कि सिख समुदाय को व्यक्तिगत विचारों और मतभेदों से ऊपर उठकर पंथ की एकता के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिख रहत मर्यादा लंबे विचार-विमर्श और पूर्वजों के प्रयासों से तैयार की गई है तथा दुनिया भर के गुरुद्वारों में धार्मिक मर्यादा के पालन का आधार है। उन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब के प्रति समर्पण को प्रत्येक सिख का कर्तव्य बताते हुए कहा कि पंथ की एकता बनाए रखने के लिए निर्धारित मर्यादा का पालन आवश्यक है। उन्होंने सिख समुदाय से धार्मिक मतभेदों को आपसी बातचीत से सुलझाने और सोशल मीडिया का इस्तेमाल एक-दूसरे के विरुद्ध प्रचार करने के बजाय सकारात्मक कार्यों के लिए करने की अपील की।
जत्थेदार ने कहा कि सिख परिवारों को बच्चों के धार्मिक और नैतिक विकास के लिए ठोस योजनाएं बनानी चाहिए। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को नियमित रूप से गुरुद्वारों में ले जाने, उन्हें सेवा में भाग लेने के अवसर देने और उनके साथ पर्याप्त समय बिताने का आग्रह किया। उन्होंने सिख परिवारों में विवाह संबंध स्थापित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आनंद कारज केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि विचारों का भी मेल है। उन्होंने इस संबंध में गुरु अमरदास जी के जीवन से प्रेरणा लेने की बात कही। साथ ही, उन्होंने विदेशों में सिख युवतियों को कथित तौर पर बहला-फुसलाकर प्रभावित करने की समस्या का उल्लेख करते हुए इससे निपटने के लिए ठोस प्रयासों की आवश्यकता जताई।
ज्ञानी गड़गज्ज ने नॉर्वे की संगत से आग्रह किया कि वे हर एक-दो साल में बच्चों को पंजाब लेकर जाएं और श्री दरबार साहिब, अमृतसर के दर्शन कराएं, ताकि नयी पीढ़ी अपनी जड़ों और पंजाब की विरासत से जुड़ी रहे। उन्होंने अमृतसर के स्थापना दिवस के 450 वर्ष पूरे होने के अवसर पर संगत को वहां पहुंचकर माथा टेकने का निमंत्रण भी दिया। उन्होंने सिख परिवारों से पंजाब में अपनी जमीनें नहीं बेचने की अपील की। उन्होंने सिख समुदाय से जरूरतमंद परिवारों की सीधे सहायता करने और आपसी प्रेम तथा सम्मान बनाए रखने का आह्वान किया। इस अवसर पर गुरुद्वारा श्री गुरु नानक देव जी, ओस्लो की नई इमारत के निर्माण के लिए संगत से सहयोग देने की अपील की गई। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज को सिरोपा भेंट कर सम्मानित किया।
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